हे गणनायक जय सुखदायक (Hey Gananayak Jai Sukhdayak)

हे गणनायक जय सुखदायक,

जय गणपति गणराज रे,

गणपति नमः गणपति नमः,

गणपति नमः गणपति नमः ॥


शंकर सुवन भवानी के नंदन,

गौरी पुत्र गणेश, गौरी पुत्र गणेश,

जो कोई मानव तुझको ध्यावे,

मिट जाए सब क्लेश,

विघ्नविनायक कष्टनिवारक,

हे गणपति गणराज रे,

गणपति नमः गणपति नमः,

गणपति नमः गणपति नमः ॥


लम्बोदर गजवदनविनायक,

मन में करो बसेरा, मन में करो बसेरा,

दर्शन पाकर तुम्हरा दाता,

हो जाए दूर अँधेरा,

ऐसी शक्ति दे दो मुझको,

जपते रहे तेरा नाम रे,

गणपति नमः गणपति नमः,

गणपति नमः गणपति नमः ॥


गौरी के तुम पुत्र कहाओ,

मूषक वाहन सवारी, मूषक वाहन सवारी,

भरी सभा में आज तू भगवन,

राखो लाज हमारी,

भक्तन के तुम हो रखवारे,

पुरे करो सब काम रे,

गणपति नमः गणपति नमः,

गणपति नमः गणपति नमः ॥


हे गणनायक जय सुखदायक,

जय गणपति गणराज रे,

गणपति नमः गणपति नमः,

गणपति नमः गणपति नमः ॥


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जो राम को लाए है, हम उनको लाएंगे (Jo Ram Ko Laye Hai Hum Unko Layenge)

जो राम को लाए है,
हम उनको लाएंगे,

नाग स्तोत्रम् (Nag Stotram)

ब्रह्म लोके च ये सर्पाःशेषनागाः पुरोगमाः।

अनंग त्रयोदशी व्रत कथा

चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी को अनंग त्रयोदशी कहा जाता है। अनंग त्रयोदशी व्रत प्रेम और सौंदर्य का प्रतीक माना जाता है।

मेरे तन में भी राम, मेरे मन में भी राम(Mere Tan Mein Bhi Ram Mere Maan Mein Bhi Ram)

मेरे तन में भी राम,
मेरे मन में भी राम,

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