कृष्ण कन्हैया बंसी बजैया (Krishna Kanhaiya Bansi Bajaiya)

कृष्ण कन्हैया बंसी बजैया,

नंदलाला घनश्याम रे,

गोवर्धन गिरधारी कान्हा,

तेरे कितने नाम रे,

बोलो श्याम राधे श्याम,

बोलो श्याम राधे श्याम ॥


श्यामसखा गिरिवरधारी,

मुरली मनोहर बनवारी,

जितने सुंदर नाम है तेरे,

उतने सुंदर काम रे,

गोवर्धन गिरधारी कान्हा,

तेरे कितने नाम रे,

बोलो श्याम राधे श्याम,

बोलो श्याम राधे श्याम ॥


मोहन तुम ब्रज के ग्वाला,

रसिया माधव गोपाला,

तेरा ध्यान धरूँ नटनागर,

हर सुबह हर शाम रे,

गोवर्धन गिरधारी कान्हा,

तेरे कितने नाम रे,

बोलो श्याम राधे श्याम,

बोलो श्याम राधे श्याम ॥


इतना दो वरदान प्रभु,

कर दो यह एहसान प्रभु,

तेरे चरणों में बीते ये मेरी,

उम्र तमाम रे,

गोवर्धन गिरधारी कान्हा,

तेरे कितने नाम रे,

बोलो श्याम राधे श्याम,

बोलो श्याम राधे श्याम ॥


कृष्ण कन्हैया बंसी बजैया,

नंदलाला घनश्याम रे,

गोवर्धन गिरधारी कान्हा,

तेरे कितने नाम रे,

बोलो श्याम राधे श्याम,

बोलो श्याम राधे श्याम ॥

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शंकर तेरी जटा से बहती है गंग धारा (Shankar Teri Jata Se Behti Hai Gang Dhara)

शंकर तेरी जटा से,
बहती है गंग धारा,

ज्वारे और अखंड ज्योत की परंपरा

तैत्तिरीय उपनिषद में अन्न को देवता कहा गया है- अन्नं ब्रह्मेति व्यजानत्। साथ ही अन्न की निंदा और अवमानना ​​का निषेध किया गया है- अन्नं न निन्द्यात् तद् व्रत। ऋग्वेद में अनेक अनाजों का वर्णन है I

खेल पंडा खेल पंडा खेल पंडा रे

खेल पंडा खेल पंडा खेल पंडा रे। (खेल पंडा खेल पंडा खेल पंडा रे।)

श्री परशुराम चालीसा (Shri Parshuram Chalisa)

श्री गुरु चरण सरोज छवि, निज मन मन्दिर धारि।
सुमरि गजानन शारदा, गहि आशिष त्रिपुरारि।।

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