हे शिव शंकर भोले बाबा, मैं तेरे गुण गाऊं(Hey Shiv Shankar Bhole Baba, Main Tere Gun Gaoon)

हे शिव शंकर भोले बाबा,

मैं तेरे गुण गाऊं,

ऐसा वर दे इन चरणों में,

ऐसा वर दे इन चरणों में,

सगरे जनम बिताऊं,

हे शिव शंकर भोलें बाबा,

मैं तेरे गुण गाऊं ॥


सोऽहं कहके मैं जन्मी थी,

तूने शिवम बताया,

धन्य भया ये जीवन मेरा,

सारा भरम मिटाया,

किरपा कर तू कर दे मुझपे,

किरपा कर तू कर दे मुझपे,

भव सागर तर जाऊं,

हे शिव शंकर भोलें बाबा,

मैं तेरे गुण गाऊं ॥


द्वंद्व द्वेष सब मिट गए मेरे,

द्वार पे आके तेरे,

जन्म जन्म की धुंध छटी है,

पाप कटे है मेरे,

कुछ ऐसा कर दे हे भोले,

कुछ ऐसा कर दे हे भोले,

परम शांति मैं पाऊं,

हे शिव शंकर भोलें बाबा,

मैं तेरे गुण गाऊं ॥


सदा मांगती रही मैं तुझसे,

ऋणी रही मैं तेरी,

दयानिधि कल्याण करो अब,

सुन लो विनती मेरी,

मेरे सर पे ऋण है तेरा,

मेरे सर पे ऋण है तेरा,

कैसे उसे चुकाऊं,

हे शिव शंकर भोलें बाबा,

मैं तेरे गुण गाऊं ॥


हे शिव शंकर भोले बाबा,

मैं तेरे गुण गाऊं,

ऐसा वर दे इन चरणों में,

ऐसा वर दे इन चरणों में,

सगरे जनम बिताऊं,

हे शिव शंकर भोलें बाबा,

मैं तेरे गुण गाऊं ॥

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नित महिमा मै गाउँ मैया तेरी (Nit Mahima Mai Gaun Maiya Teri)

नित महिमा मैं गाउँ मैया तेरी ॥
और क्या माँगू मैं तुमसे माता,

फाल्गुन महीना दुर्गा अष्टमी

प्रत्येक माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि मां दुर्गा को समर्पित है। इस शुभ तिथि पर जगत की देवी मां दुर्गा की पूजा-भक्ति की जाती है। साथ ही अष्टमी का व्रत रखा जाता है।

नर्मदा नदी की कथा

नर्मदा नदी पहाड़, जंगल और कई प्राचीन तीर्थों से होकर गुजरती हैं। वेद, पुराण, महाभारत और रामायण सभी ग्रंथों में इसका जिक्र है। इसका एक नाम रेवा भी है। माघ माह में शुक्ल पक्ष सप्तमी को नर्मदा जयन्ती मनायी जाती है।

मेरी चुनरी में पड़ गयो दाग री(Meri Chunri Mein Pad Gayo Dag Ri)

मेरी चुनरी में पड़ गयो दाग री,
कैसो चटक रंग डारो,

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