जिस काँधे कावड़ लाऊँ, मैं आपके लिए(Jis Kandhe Kawad Laun Main Aapke Liye)

जिस काँधे कावड़ लाऊँ,

मैं आपके लिए,

वो काँधा काम आ जाए,

माँ और बाप के लिए,

वो काँधा काम आ जाए,

माँ और बाप के लिए ॥


जब काँधे पे मैं कावड़ उठाऊँ,

उससे मैं जितना पुण्य कमाऊँ,

उसको रखू मैं बचाके आशीर्वाद के लिए,

वो काँधा काम आ जाए,

माँ और बाप के लिए,

वो काँधा काम आ जाए,

माँ और बाप के लिए ॥


इन काँधों में ऐसी तू शक्ति भरदे,

आखरी समय में उनकी सेवा करदे,

काम मुश्किल ये नहीं है भोलेनाथ के लिए,

वो काँधा काम आ जाए,

माँ और बाप के लिए,

वो काँधा काम आ जाए,

माँ और बाप के लिए ॥


कावड़ हो या अर्थी भोले आए तेरे पास हो,

‘बनवारी’ तेरे ऊपर इतना तो विश्वास हो,

तेरा कावड़िया ना तरसे सर पे हाथ के लिए,

वो काँधा काम आ जाए,

माँ और बाप के लिए,

वो काँधा काम आ जाए,

माँ और बाप के लिए ॥


जिस काँधे कावड़ लाऊँ,

मैं आपके लिए,

वो काँधा काम आ जाए,

माँ और बाप के लिए,

वो काँधा काम आ जाए,

माँ और बाप के लिए ॥

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मेरो गोपाल झूले पलना (Mero Gopal Jhule Palna)

मेरो गोपाल झूले पलना,
मदन गोपाल झूले पलना,

दादी को नाम अनमोल, बोलो जय दादी की (Dadi Ko Naam Anmol Bolo Jay Dadi Ki )

दादी को नाम अनमोल,
बोलो जय दादी की,

सामा-चकेवा और मुढ़ी-बतासे

सामा-चकेवा मिथिलांचल में भाई-बहन के प्रेम और अपनत्व का प्रतीक है। यह पर्व कार्तिक शुक्ल सप्तमी से कार्तिक पूर्णिमा तक नौ दिन चलता है।

लूटूरू महादेव चलो(Lutru Mahadev Chalo)

लूटरू महादेव जय जय,
लुटरू महादेव जी,

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