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नवरात्रि माँ दुर्गा के नौ रूपों की आराधना का पावन पर्व है। भारत के विभिन्न क्षेत्रों में इसे बड़े श्रद्धा और भक्ति भाव से मनाया जाता है। एक वर्ष में चार बार नवरात्र आते हैं—चैत्र, आषाढ़, माघ और शारदीय नवरात्र। इनमें चैत्र और शारदीय नवरात्र को मुख्य माना गया है, जबकि आषाढ़ और माघ को गुप्त नवरात्र कहा जाता है। नवरात्रि के प्रत्येक दिन माता के अलग-अलग स्वरूप की पूजा होती है। शक्ति स्वरूपा माँ दुर्गा की उपासना के लिए यह श्रेष्ठ समय माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि भगवान श्रीराम ने नवरात्रि के दौरान माँ भगवती की आराधना कर विजयादशमी के दिन रावण का वध किया था। भक्त भी नौ दिनों तक माँ की पूजा-अर्चना कर उनकी कृपा प्राप्त करना चाहते हैं। आइए जानते हैं देवी दुर्गा के पूजन की विधि।
पूजा प्रारंभ करने से पहले आचमन करें और निम्न मंत्रों का उच्चारण करें:
ओम एं आत्मतत्त्वं शोधयामि नमः स्वाहा।। ओम हीं विद्यातत्तवं शोधयामि नमः स्वाहा।। ओम क्लीं शिवतत्त्वं शोधयामि नमः स्वाहा।।
सनातन धर्म में प्रत्येक शुभ कार्य में दीप जलाना आवश्यक माना जाता है। दीप प्रज्ज्वलन से पूर्व यह मंत्र बोलें:
ओम भो दीप देवरूपस्त्वं कर्मसाक्षी ह्राविघ्नकृत। यावत्कर्म समाप्तिः स्यात् तावत्त्वं सुस्थिरो भव।।
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