नौरता की रात मैया, गरबे रमवा आणो है (Norta ki Raat Maiya Garba Rambwa Aano Hai)

नौरता की रात मैया,

गरबे रमवा आणो है,

थाने वादों निभाणो है,

नौरता की रात ॥


साथी सहेलियां,

मईया जोवे थारी बाट,

मईया जी थाने आवणो,

माथा पे हो टीका,

काना में हो झुमका,

सज ने थाणे आवणो,

नौरता की रात मईया,

गरबे रमवा आणो है,

थाणे वादे निभाणो है,

नौरता की रात ॥


हाथा में हो चुडलो,

पावा में हो पायल,

हो छम छम करती आवणो,

सर पे हो चुनरिया,

लाले हो रंग री,

घुंगटा में थाणे आवणो,

नौरता की रात मईया,

गरबे रमवा आणो है,

थाणे वादों निभाणो है,

नौरता की रात ॥


नौरता की रात मैया,

गरबे रमवा आणो है,

थाने वादों निभाणो है,

नौरता की रात ॥

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धनतेरस की पौराणिक कथा

धनतेरस का पर्व प्रति वर्ष कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि अपने हाथ में अमृत से भरा कलश लेकर प्रकट हुए थे।

भगवान कार्तिकेय के प्रमुख मंदिर

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, कार्तिक चंद्र मास शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को भगवान कार्तिकेय का जन्म हुआ था। इसलिए भक्त हर महीने इस तिथि को उनका जन्मोत्सव मनाते हैं।

कार्तिगाई दीपम पौराणिक कथा

कार्तिगाई दीपम का पर्व मुख्य रूप से तमिलनाडु, श्रीलंका समेत विश्व के कई तमिल बहुल देशों में मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन भगवान शिव, माता पार्वती और उनके पुत्र कार्तिकेय की पूजा करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है।

क्यों मनाई जाती है गीता जयंती?

सनातन धर्म में एकादशी व्रत को अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है। मार्गशीर्ष माह में मोक्षदा एकादशी मनाई जाती है। इसी दिन गीता जयंती का पर्व भी मनाया जाता है।

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