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बिगड़ी मेरी बना जा, ओ शेरोवाली माँ (Bigdi Meri Bana Ja O Sheronwali Maa)

बिगड़ी मेरी बना जा,

ओ शेरोवाली माँ,

शेरोवाली माँ जोतावाली माँ,

पहाडोंवाली माँ झंडेयावाली माँ,

एक बार तू आजा ओ मेहरोवाली माँ,

बिगडी मेरी बना जा,

ओ शेरोवाली माँ ॥


बागों से कलियाँ चुन चुन,

तेरा सुन्दर भवन सजाऊँ,

तारों जड़ी चुनरिया,

जयपुर से मैं तो लाऊँ,

अपनी झलक दिखा जा,

ओ शेरोवाली माँ,

बिगडी मेरी बना जा,

ओ शेरोवाली माँ ॥


पान सुपारी ध्वजा नारियल,

तेरी भेंट चढ़ाऊँ,

हलवा छोले पूरी,

तेरा भोग मैं बनाऊं,

आकर भोग लगा जा,

ओ शेरोवाली माँ,

बिगडी मेरी बना जा,

ओ शेरोवाली माँ ॥


‘चोखानी’ को तुम्हारी,

ममता की प्यास बाकी,

‘टोनी’ को अम्बे रानी,

इतनी सी आस बाकी,

आकर गले लगा जा,

ओ शेरोवाली माँ,

बिगडी मेरी बना जा,

ओ शेरोवाली माँ ॥


बिगड़ी मेरी बना जा,

ओ शेरोवाली माँ,

शेरोवाली माँ जोतावाली माँ,

पहाडोंवाली माँ झंडेयावाली माँ,

एक बार तू आजा ओ मेहरोवाली माँ,

बिगडी मेरी बना जा,

ओ शेरोवाली माँ ॥


माँ गौरी के लाल गजानन(Maa Gauri Ke Lal Gajanan)

माँ गौरी के लाल गजानन,
आज आओ पधारो मेरे आँगन,

शीतला अष्टमी पर बासी भोजन का महत्व

शीतला अष्टमी, जिसे बसोड़ा भी कहा जाता है, होली के सात दिन बाद मनाई जाती है। इस दिन माता शीतला को बासी भोजन का भोग अर्पित किया जाता है।

शंकर का डमरू बाजे रे: शिव भजन (Shankar Ka Damru Baje Re)

शंकर का डमरू बाजे रे,
कैलाशपति शिव नाचे रे ॥

पौष मास है छोटा पितृ पक्ष

पौष मास को छोटा पितृ पक्ष भी कहा जाता है। सूर्यदेव के कन्या राशि में आने पर होने वाले मुख्य पितृ पक्ष के अलावा इस माह में भी श्राद्ध तथा पिंडदान के अलावा भगवान विष्णु और सूर्यदेव की पूजा का भी विशेष महत्व है।

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