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कांच ही बांस के बहंगिया (Kaanch Hi Baans Ke Bahangiya)

कांच ही बांस के बहंगिया, 

बहंगी लचकति जाए।

बहंगी लचकति जाए।

बात जे पुछेले बटोहिया,

बेहंगी केकरा के जाए? 

बहंगी केकरा के जाए? 


तू त आन्हर हउवे रे बटोहिया, 

बहंगी छठी माई के जाए... 

बहंगी छठी माई के जाए... 

कांच ही बांस के बहंगिया, 

बहंगी लचकति जाए।

बहंगी लचकति जाए।


केरवा जे फरेला घवद से,

ओह पर सुगा मेंड़राय... 

ओह पर सुगा मेंड़राय... 

खबरी जनइबो अदित से 

सुगा देले जूठियाय 

सुगा देले जूठियाय... 

ऊ जे मरबो रे सुगवा धनुष से 

सुगा गिरे मुरछाय... 

सुगा गिरे मुरछाय... 

केरवा जे फरेला घवद से 

ओह पर सुगा मेंड़राय... 

ओह पर सुगा मेंड़राय… 


तेरी जय हों जय हों, जय गोरी लाल(Teri Jay Ho Jay Ho Jay Gauri Lal)

तेरी जय हो जय हो,
जय गोरी लाल ॥

हर ग्यारस खाटू में अमृत जो बरसता है (Har Gyaras Khatu Me Amrit Jo Barasta Hai)

हर ग्यारस खाटू में,
अमृत जो बरसता है,

हो होली खेलत आज युगल जोड़ी(Holi Khelat Aaj Jugal Jodi)

हो होली खेलत आज युगल जोड़ी
होली खेलत आज युगल जोड़ी, होली खेलत

वैकुंठ चतुर्दशी का महत्व

वैकुंठ चतुर्दशी हिंदू धर्म में एक अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व है। इसे कार्तिक शुक्ल चतुर्दशी के दिन मनाया जाता है। यह कार्तिक पूर्णिमा के एक दिन पहले आता है और देव दिवाली से भी संबंधित है।

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