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केलवा के पात पर(Kelwa Ke Paat Par)

केलवा के पात पर उगेलन सुरुज मल झांके ऊंके

केलवा के पात पर उगेलन सुरुज मल झांके ऊंके

हो करेलु छठ बरतिया से झांके ऊंके

हम तोसे पूछी बरतिया ऐ बरितया से केकरा लागी

हम तोसे पूछी बरतिया ऐ बरितया से केकरा लागी

हे करेलू छठ बरतिया से केकरा लागी

हे करेलू छठ बरतिया से केकरा लागी

हमरो जे बेटवा पवन ऐसन बेटवा से उनके लागी

हमरो जे बेटवा पवन ऐसन बेटवा से उनके लागी

हे करेलू छठ बरतिया से उनके लागी

हे करेलू छठ बरतिया से उनके लागी

अमरुदिया के पात पर उगेलन सुरूज मल झांके झुके

अमरुदिया के पात पर उगेलन सुरूज मल झांके झुके

हे करेलु छठ बरतिया से झांके झुके

हे करेलु छठ बरतिया से झांके झुके

हम तोसे पूछी बरतिया ए बरितिया से केकरा लागी

हम तोसे पूछी बरतिया ए बरितिया से केकरा लागी

हे करेलू छठ बरतिया से केकरा लागी

हे करेलू छठ बरतिया से केकरा लागी

हमरो जे स्वामी पवन एसन स्वामी उनके लागी

हमरो जे स्वामी पवन एसन स्वामी उनके लागी

हे करेली छठ बरतिया से उनके लागी

हे करेली छठ बरतिया से उनके लागी

नारियर के पात पर उगेलन सुरूजमल झांके झूके

नारियर के पात पर उगेलन सुरूजमल झांके झूके

हे करेलू छठ बरतिया से झांके झूके

हे करेलू छठ बरतिया से झांके झूके

हम तोसे पूछी बरतिया ए बरतिया से केकरा लागी

हम तोसे पूछी बरतिया ए बरतिया से केकरा लागी

हे करेलू छठ बरतिया से केकरा लागी

हे करेलू छठ बरतिया से केकरा लागी

हमरो जे बेटी पवन ऐसन बेटिया से उनके लागी

हमरो जे बेटी पवन ऐसन बेटिया से उनके लागी

हे करेलू छठ बरतिया से उनके लागी

हे करेलू छठ बरतिया से उनके लागी

दशहरा पूजन विधि

हर वर्ष आश्विन मास की शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को विजयदशमी या दशहरा का पर्व मनाया जाता है जो कि अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक माना जाता है।

कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की प्रबोधिनी एकादशी (Kaartik Maas Ke Shukl Paksh Kee Prabodhinee Ekaadashee)

ब्रह्माजी ने कहा कि हे मनिश्रेष्ठ ! गंगाजी तभई तक पाप नाशिनी हैं जब तक प्रबोधिनी एकादशी नहीं आती। तीर्थ और देव स्थान भी तभी तक पुण्यस्थल कहे जाते हैं जब तक प्रबोधिनी का व्रत नहीं किया जाता।

मेरी बालाजी सुनेंगे फरियाद(Meri Balaji Sunenge Fariyad)

मेरी बालाजी सुनेंगे फरियाद,
बालाजी ज़रूर सुनेंगे,

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