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कबहुँ ना छूटी छठि मइया (Kabahun Na Chhooti Chhath)

कबहुँ ना छूटी छठि मइया,

हमनी से बरत तोहार

हमनी से बरत तोहार


तहरे भरोसा हमनी के,

छूटी नाही छठ के त्योहार

छूटी नाही छठ के त्योहार


अपने सरन में ही रखिह,

दिह आसिस हज़ार

दिह आसिस हज़ार


गोदिया भराईल छठी मइय्या,

बाटे राऊर किरपा अपार

बाटे राऊर किरपा अपार


चाहें रहब देसवा बिदेसवा,

छठ करब हम हर बार

छठ करब हम हर बार


डूबतो सुरुज के जे पूजे,

इहे बाटे हमर बिहार

इहे बाटे हमर बिहार


फलवा दउरवा सजाके,

अईनी हम घाट पे तोहार

अईनी हम घाट पे तोहार


दिहनी अरघ छठी मईया,

करीं हमर आरती स्वीकार

करीं हमर आरती स्वीकार


कबहुँ ना छूटी छठि मइया,

हमनी से बरत तोहार

हमनी से बरत तोहार


तहरे भरोसा हमनी के,

छूटी नाही छठ के त्योहार

छूटी नाही छठ के त्योहार

छूटी नाही छठ के त्योहार

छूटी नाही छठ के त्योहार

उत्पन्ना एकादशी पर एकाक्षी नारियल अर्पण

उत्पन्ना एकादशी हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण त्योहार है, जो भगवान विष्णु और एकादशी माता की पूजा के लिए विशेष माना जाता है।

ललिता चालीसा का पाठ

ललिता जयंती का पर्व हर साल माघ मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। ललिता माता आदिशक्ति त्रिपुर सुंदरी जगत जननी हैं। मान्यता है कि देवी के दर्शन मात्र से ही भक्तों के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं।

कभी-कभी भगवान को भी भक्तो (Kabhi Kabhi Bhagwan Ko Bhi Bhakto Se Kam Pade)

प्रभु केवट की नाव चढ़े
कभी कभी भगवान को भी भक्तो से काम पड़े ।

प्रभु जो तुम्हे हम, बताकर के रोये (Prabhu Jo Tumhe Hum Batakar Ke Roye)

प्रभु जो तुम्हे हम,
बताकर के रोये,