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मैया बधाईं है बधाईं है (Maiya Badhai Hai Badhai Hai)

मैया बधाई है बधाई है,

बाबा बधाई है बधाई है,

ब्रज में ये कैसी ख़ुशी छाई है,

ब्रज में ये कैसी ख़ुशी छाई है,

मैया बधाईं है बधाईं है,

बाबा बधाई है बधाई है ॥


घर घर में कैसी ख़ुशी छाई है,

श्याम दीवाने गावे बधाई है,

घर घर में कैसी ख़ुशी छाई है,

श्याम दीवाने गावे बधाई है,

मन में है अति ख़ुशी छाई है,

मैया बधाईं है बधाईं है,

बाबा बधाई है बधाई है ॥


भक्तो ने कैसी धूम मचाई है,

द्वारे पे बाजे शहनाई है,

भक्तो ने कैसी धूम मचाई है,

द्वारे पे बाजे शहनाई है,

बाबा ने सम्पती लुटाई है,

मैया ने बधाई बंटवाई है,

मैया बधाईं है बधाईं है,

बाबा बधाई है बधाई है ॥


मैया बधाईं है बधाईं है,

बाबा बधाई है बधाई है,

ब्रज में ये कैसी ख़ुशी छाई है,

ब्रज में ये कैसी ख़ुशी छाई है,

मैया बधाईं है बधाईं है,

बाबा बधाई है बधाई है ॥

तुलसा कर आई चारों धाम (Tulsa Kar Aai Chaaron Dham)

तुलसा कर आई चारों धाम,
जाने कहां लेगी विश्राम ।

भगत पुकारे आज मावड़ी(Bhagat Pukare Aaj Mawadi)

भादी मावस है आई,
भक्ता मिल ज्योत जगाई,

श्री गंगा चालीसा (Shri Ganga Chalisa)

जय जय जय जग पावनी, जयति देवसरि गंग ।
जय शिव जटा निवासिनी, अनुपम तुंग तरंग ॥

इष्टि पौराणिक कथा और महत्व

इष्टि, वैदिक काल का एक विशेष प्रकार का यज्ञ है। जो इच्छाओं की पूर्ति और जीवन में शांति लाने के उद्देश्य से किया जाता है। संस्कृत में 'इष्टि' का अर्थ 'यज्ञ' होता है। इसे हवन की तरह ही आयोजित किया जाता है।