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मेरा श्याम बड़ा अलबेला (Mera Shyam Bada Albela)

मेरा श्याम बड़ा अलबेला,

मेरी मटकी में मार गया ढेला,

मेरा श्याम बड़ा अलबेला,

मेरी मटकी में मार गया ढेला,


कभी गंगा के तीर,

कभी यमुना के तीर,

कभी गंगा के तीर,

कभी यमुना के तीर,

कभी सरयू में नहाये अकेला,

कभी सरयू में नहाये अकेला,

मेरी मटकी में मार गया ढेला,

मेरा श्याम बडा अलबेला,

मेरी मटकी में मार गया ढेला ॥


कभी गोपियों के संग,

कभी ग्वालों के संग,

कभी गोपियों के संग,

कभी ग्वालों के संग,

कभी गउवे चराये अकेला,

कभी गउवे चराये अकेला,

मेरी मटकी में मार गया ढेला,

मेरा श्याम बडा अलबेला,

मेरी मटकी में मार गया ढेला ॥


कभी भामा के संग,

कभी रुक्मणि के संग,

कभी भामा के संग,

कभी रुक्मणि के संग,

कभी राधा के संग अकेला,

कभी राधा के संग अकेला,

मेरी मटकी में मार गया ढेला,

मेरा श्याम बडा अलबेला,

मेरी मटकी में मार गया ढेला ॥


कभी सूरज के संग,

कभी चंदा के संग,

कभी सूरज के संग,

कभी चंदा के संग,

कभी तारो से खेले अकेला,

कभी तारो से खेले अकेला,

मेरी मटकी में मार गया ढेला,

मेरा श्याम बडा अलबेला,

मेरी मटकी में मार गया ढेला ॥


कभी संतों के संग,

कभी भक्तों के संग,

कभी संतों के संग,

कभी भक्तों के संग,

कभी मस्ती में बैठा अकेला,

कभी मस्ती में बैठा अकेला,

मेरी मटकी में मार गया ढेला,

मेरा श्याम बडा अलबेला,

मेरी मटकी में मार गया ढेला ॥


मेरा श्याम बड़ा अलबेला,

मेरी मटकी में मार गया ढेला,

मेरा श्याम बड़ा अलबेला,

मेरी मटकी में मार गया ढेला,


नटराज स्तुति पाठ

सनातन धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व है। इस दिन भगवान शंकर की पूजा की जाती है। कहा जाता है कि इस व्रत को रखने से घर में खुशहाली आती है। साथ ही सुख और सौभाग्य में वृद्धि होती है।

माता रानी कीजिये, किरपा की बरसात (Mata Rani Kijiye Karipa Ki Barsat)

माता रानी कीजिये,
किरपा की बरसात,

30 नवंबर या 1 दिसंबर, कब है मार्गशीर्ष अमावस्या?

हिंदू धर्म में दर्श अमावस्या का दिन अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। हर महीने आने वाली अमावस्या को दर्श अमावस्या कहते हैं। यह दिन पितरों को श्रद्धांजलि देने के लिए समर्पित है।

कालाष्टमी पर क्या दान करें?

वैदिक पंचांग के अनुसार, हर माह कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कालाष्टमी का पर्व मनाया जाता है। इस वर्ष यानी 2024 के नवंबर माह में ये तिथि 22 तारीख को पड़ रही है। इस दिन भगवान शिव के रौद्र रूप काल भैरव देव की विधिपूर्वक पूजा की जाती है, जो तंत्र-मंत्र साधकों के लिए विशेष महत्व रखती है।