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मोहे लागी लगन गुरु चरणन की(Mohe Lagi Lagan Guru Charanan Ki)

श्लोक:

अखंड-मंडलाकारं

व्याप्तम येन चराचरम

तत्पदं दर्शितं येन

तस्मै श्री गुरवे नमः ॥

गुरुर ब्रह्मा गुरुर विष्णु,

गुरुर देवो महेश्वरः,

गुरुः साक्षात्परब्रह्मा,

तस्मै श्री गुरुवे नमः ॥


मोहे लागी लगन गुरु चरणन की,

गुरु चरणन की, गुरु चरणन की,

मोहे लागी लगन गुरु चरणन की ॥


चरण बिना मुझे कुछ नहीं भाये,

जग माया सब स्वपनन की,

मोहें लागी लगन गुरु चरणन की ॥


भव सागर सब सूख गए है,

फिकर नाही मोहे तरनन की,

मोहें लागी लगन गुरु चरणन की ॥


आत्म ज्ञान दियो मेरे सतगुरु,

पीड़ा मिटी भव मरनन की,

मोहें लागी लगन गुरु चरणन की ॥


मीरा के प्रभु गिरिधर नागर,

आस बंधी गुरु चरणन की,

मोहें लागी लगन गुरु चरणन की ॥


मोहें लागी लगन गुरु चरणन की,

गुरु चरणन की, गुरु चरणन की,

मोहे लागी लगन गुरु चरणन की ॥

मेरो मन राम ही राम रटे रे (Mero Maan Ram Hi Ram Rate Re)

मेरो मन राम ही राम रटे रे,
राम ही राम रटे रे ॥

बालाजी ने ध्याले तू: भजन (Balaji Ne Dhyale Tu)

मंगलवार शनिवार,
बालाजी ने ध्याले तू,

होलाष्टक पर भूलकर भी ना करें ये गलती

होलाष्टक की तिथि शुभ कार्य के लिए उचित नहीं मानी जाती है, इन तिथियों के अनुसार इस समय कुछ कार्य करने से सख्त मनाही होती है। क्योंकि इन्हीं दिनों में भक्त प्रह्लाद पर उनके पिता हिरण्यकश्यप ने बहुत अत्याचार किया था।

बधाई भजन: बजे कुण्डलपर में बधाई, के नगरी में वीर जन्मे (Badhai Bhajan Baje Kundalpur Me Badayi Nagri Me Veer Janme)

बजे कुण्डलपर में बधाई,
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