नवीनतम लेख

मुरली बजा के मोहना (Murli Bajake Mohana Kyon Karliya Kinara)

मुरली बजा के मोहना, क्यों कर लिया किनारा।

अपनों से हाय कैसा, व्यवहार है तुम्हारा॥


ढूंढा गली गली में, खोजा डगर डगर में।

मन में यही लगन है, दर्शन मिले दुबारा॥

॥ मुरली बजा के मोहना...॥


मधुबन तुम्ही बताओ, मोहन कहाँ गया है।

कैसे झुलस गया है, कोमल बदन तुम्हारा॥

॥ मुरली बजा के मोहना...॥


यमुना तुम्हीं बताओ, छलिया कहाँ गया है।

तूँ भी छलि गयी है, कहती है नील धारा॥

॥ मुरली बजा के मोहना...॥


दुनियां कहे दीवानी, मुझे पागल कहे जमाना।

पर तुमको भूल जाना, हमको नहीं गवांरा॥

॥ मुरली बजा के मोहना...॥


मुरली बजा के मोहना, क्यों कर लिया किनारा।

अपनों से हाय कैसा, व्यवहार है तुम्हारा॥

जो भी भला बुरा है, श्री राम जानते है (Jo Bhi Bhala Bura Hai Shri Ram Jante Hain)

जो भी भला बुरा है,
श्री राम जानते है,

स्कंद षष्ठी व्रत की पौराणिक कथा

स्कंद षष्ठी व्रत भगवान कार्तिकेय जिन्हें मुरुगन, सुब्रमण्यम और स्कंद के नाम से भी जाना जाता है उनकी पूजा को समर्पित है। यह व्रत मुख्यतः दक्षिण भारत में मनाया जाता है। भगवान कार्तिकेय को युद्ध और शक्ति के देवता के रूप में पूजते हैं।

मैं हूँ शरण में तेरी संसार के रचैया: भजन (Main Hun Sharan Me Teri)

मैं हूँ शरण में तेरी,
संसार के रचैया,

धारा तो बह रही है (Dhara Too Beh Rahi Hai)

धारा तो बह रही है,
श्री राधा नाम की,