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राम सीता और लखन वन जा रहे - भजन (Ram Sita Aur Lakhan Van Ja Rahe)

राम सीता और लखन वन जा रहे,

हाय अयोध्या में अँधेरे छा रहे,

राम सीता और लखन वन जा रहे ॥


मुर्ख कैकई ने किया है ये सितम,

मुर्ख कैकई ने किया है ये सितम,

दुःख दिल में जो की सब जन पा रहे,

दुःख दिल में जो की सब जन पा रहे,

॥ हाय अयोध्या में अँधेरे छा रहे..॥


रह सकेंगे प्राण तन में क्या मेरे,

रह सकेंगे प्राण तन में क्या मेरे,

ध्यान में ना ये नतीजे ला रहे,

ध्यान में ना ये नतीजे ला रहे,

॥ हाय अयोध्या में अँधेरे छा रहे..॥


क्या विचारा था मेने क्या हो रहा,

क्या विचारा था मेने क्या हो रहा,

फूल आशाओ के खिल मुरझा रहे,

फूल आशाओ के खिल मुरझा रहे,

॥ हाय अयोध्या में अँधेरे छा रहे...॥


गा रहे थे जो ख़ुशी के गीत कल,

गा रहे थे जो ख़ुशी के गीत कल,

आज वे दुःख के विरह यूँ गा रहे,

आज वे दुःख के विरह यूँ गा रहे,

॥ हाय अयोध्या में अँधेरे छा रहे..॥


भाग्य में क्या ये विधाता लिख दिया,

भाग्य में क्या ये विधाता लिख दिया,

पहुंच के मंजिल पे ठोकर खा रहे,

पहुंच के मंजिल पे ठोकर खा रहे,

॥ हाय अयोध्या में अँधेरे छा रहे..॥


रोक ले कोई उन्हें समझाय कर,

रोक ले कोई उन्हें समझाय कर,

ज्ञान प्रभु दिल में यही है मना रहे,

ज्ञान प्रभु दिल में यही है मना रहे,

॥ हाय अयोध्या में अँधेरे छा रहे..॥


राम सीता और लखन वन जा रहे,

हाय अयोध्या में अँधेरे छा रहे,

राम सीता और लखन वन जा रहे ॥

हमारे बालाजी महाराज, सभी के कष्ट मिटाते है (Hamare Balaji Maharaj Sabhi Ke Kast Mitate Hain)

हमारे बालाजी महाराज,
सभी के कष्ट मिटाते है,

भानु सप्तमी पर सूर्य पूजा विधि

हिंदू धर्म में सूर्य उपासना को अत्यधिक महत्व दिया गया है। सूर्य देव को ऊर्जा, जीवन और स्वास्थ्य का कारक माना जाता है।

कब है गणेश जयंती

प्रत्येक वर्ष माघ मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को गणेश जयंती मनाई जाती है। इसे विनायक चतुर्थी अथवा वरद चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है।

ओ शंकर मेरे, कब होंगे दर्शन तेरे (O shankar Mere Kab Honge Darshan Tere)

ओ शंकर मेरे,
कब होंगे दर्शन तेरे,