कलियुग में सिद्ध हो देव तुम्हीं (Bhajan: Kalyug Mein Sidh Ho Dev Tumhin Hanuman)

कलियुग में सिद्ध हो देव तुम्हीं,

हनुमान तुम्हारा क्या कहना ।

तेरी शक्ति का क्या कहना,

तेरी भक्ति का क्या कहना ॥


सीता की खोज करी तुमने,

तुम सात समुन्दर पार गये ।

लंका को किया शमशान प्रभु,

बलवान तुम्हारा क्या कहना ॥

तेरी शक्ति का क्या कहना,

तेरी भक्ति का क्या कहना ।

॥ कलियुग में सिद्ध हो देव तुम्हीं...॥


जब लखन लाल को शक्ति लगी,

तुम द्रोणागिरी पर्वत लाये ।

लक्ष्मण के बचाये आ कर के,

तब प्राण तुम्हारा क्या कहना ॥

तेरी शक्ति का क्या कहना,

तेरी भक्ति का क्या कहना ।

॥ कलियुग में सिद्ध हो देव तुम्हीं...॥


तुम भक्त शिरोमनी हो जग में,

तुम वीर शिरोमनी हो जग में ।

तेरे रोम रोम में बसते हैं सिया राम,

तुम्हारा क्या कहना ॥


कलियुग में सिद्ध हो देव तुम्हीं,

हनुमान तुम्हारा क्या कहना ।

तेरी शक्ति का क्या कहना,

तेरी भक्ति का क्या कहना ॥

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Jis Bhajan Mein Ram Ka Nam Na Ho (जिस भजन में राम का नाम ना हो)

जिस भजन में राम का नाम ना हो,
उस भजन को गाना ना चाहिए ॥

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भगवान चक्रधर 12वीं शताब्दी के एक महान तत्त्वज्ञ, समाज सुधारक और महानुभाव पंथ के संस्थापक थे। महानुभाव धर्मानुयायी उन्हें ईश्वर का अवतार मानते हैं। उनका जन्म बारहवीं शताब्दी के पूर्वार्द्ध में, गुजरात के भड़ोच में हुआ था। उनका जन्म नाम हरीपालदेव था।

मुश्किल करे आसान जो, वो नाम तो हनुमान है (Mushkil Kare Aasan Jo Vo Naam To Hanuman Hai)

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राम नाम के हीरे मोती, मैं बिखराऊँ गली गली(Ram Nam Ke Heere Moti Main Bikhraun Gali Gali)

राम नाम के हीरे मोती,
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