भोले के कांवड़िया मस्त बड़े मत वाले हैं (Bhole Ke Kawadiya Masat Bade Matwale Hain)

ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय ॥


चली कांवड़ियों की टोली,

सब भोले के हमजोली,

गौमुख से गंगाजल वो लाने वाले हैं ।

भोले के कांवड़िया,

मस्त बड़े मत वाले हैं ॥


सब अलग अलग शहरों से चलकर आते हैं,

कंधे पे उठा के कावड़ दौड़े जाते हैं ।

है कठिन डगर पर ये ना,

रुकने वाले हैं ॥

॥ भोले के कावड़िया...॥


कोई भांग धतूरा बेल की पत्रि लाए हैं,

कोई दूध दही मलमल के तिलक लगाए हैं ।

यह सब मस्तानी शिव के,

चाहने वाले हैं ॥

॥ भोले के कावड़िया...॥


‘नोधी’ जिद्द छोड़ो कावड़ आप उठा भी लो,

संघ ‘लव’ के शिव भोले की महिमा गा भी लो ।

‘सनी’ ‘दीपक’ भी साथ ही जाने वाले हैं ॥

॥ भोले के कावड़िया...॥

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डमरू वाले भोले भाले, देवो में तुम देव निराले (Damru Wale Bhole Bhale Devo Me Tum Dev Nirale)

डमरू वाले भोले भाले,
देवो में तुम देव निराले,

सिद्ध-कुञ्जिका स्तोत्रम् (Siddha Kunjika Stotram)

सिद्ध-कुञ्जिका स्तोत्रम् श्रीरूद्रयामल के मन्त्र से सिद्ध है और इसे सिद्ध करने की जरूरत नहीं होती है। इस स्तोत्र को परम कल्याणकारी और चमत्कारी माना जाता है।

आदि अंत मेरा है राम (Aadi Ant Mera Hai Ram)

आदि अंत मेरा है राम,
उन बिन और सकल बेकाम ॥

कब है रुक्मिणी अष्टमी?

हिंदू धर्म में पौष मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रुक्मिणी अष्टमी के रूप में मनाया जाता है। यह पर्व भगवान श्री कृष्ण की पत्नी देवी रुक्मिणी को समर्पित है, जिन्हें माता लक्ष्मी का अवतार माना जाता है। मान्यताओं के अनुसार, रुक्मिणी अष्टमी पर ही द्वापर युग में विदर्भ के महाराज भीष्मक के यहां देवी रुक्मिणी जन्मी थीं।

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