भोले के कांवड़िया मस्त बड़े मत वाले हैं (Bhole Ke Kawadiya Masat Bade Matwale Hain)

ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय ॥


चली कांवड़ियों की टोली,

सब भोले के हमजोली,

गौमुख से गंगाजल वो लाने वाले हैं ।

भोले के कांवड़िया,

मस्त बड़े मत वाले हैं ॥


सब अलग अलग शहरों से चलकर आते हैं,

कंधे पे उठा के कावड़ दौड़े जाते हैं ।

है कठिन डगर पर ये ना,

रुकने वाले हैं ॥

॥ भोले के कावड़िया...॥


कोई भांग धतूरा बेल की पत्रि लाए हैं,

कोई दूध दही मलमल के तिलक लगाए हैं ।

यह सब मस्तानी शिव के,

चाहने वाले हैं ॥

॥ भोले के कावड़िया...॥


‘नोधी’ जिद्द छोड़ो कावड़ आप उठा भी लो,

संघ ‘लव’ के शिव भोले की महिमा गा भी लो ।

‘सनी’ ‘दीपक’ भी साथ ही जाने वाले हैं ॥

॥ भोले के कावड़िया...॥

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हे कृष्ण गोपाल हरि हे दीन दयाल हरि (Hey Krishna Gopal Hari He Deen Dayal Hari)

हे कृष्ण गोपाल हरि,
हे दीन दयाल हरि,

हनुमान तुम्हारे सीने में, दुनिया का मालिक रहता है (Hanuman Tumhare Sine Mein Duniya Ka Malik Rehta Hai)

हनुमान तुम्हारे सीने में,
दुनिया का मालिक रहता है ॥

श्री सरस्वती स्तोत्रम् (Shri Saraswati Stotram)

या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता,
या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना।

क्यों मनाई जाती है जन्माष्टमी, क्या है पूजन विधि, बांके बिहारी का ये है प्रिय भोज; जानें श्रीकृष्ण की जन्म कथा

श्रीमद्भगवद भगवत गीता में भगवान कृष्ण कहते हैं ‘जब-जब धर्म की हानि और अधर्म की वृद्धि होगी, तब-तब मैं जन्म लूंगा।’

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