ओ विष पीने वाले छुपा तू किधर है: शिव भजन (Oh Vish Pine Wale Chupa Tu Kidhar Hai)

मेरी जिंदगी में ग़मों का ज़हर है,

विष पीने वाले छुपा तू किधर है,

ओ विष पीने वाले छुपा तू किधर है ॥


ना तुमसा दयालु कोई और भोले,

ना तुमसा दयालु कोई और भोले,

जो ठुकरा के अमृत को पिए विष के प्याले,

लिया तीनों लोकों का भार अपने सर है,

विष पीने वाले छुपा तू किधर है,

ओ विष पीने वाले छुपा तू किधर है ॥


गरीबों का साथी ना बनता है कोई,

फ़साने भी उनके ना सुनता है कोई,

यहाँ फेर ली अपनों ने भी नजर है,

विष पीने वाले छुपा तू किधर है,

ओ विष पीने वाले छुपा तू किधर है ॥


बड़ी आस लेकर केतुमको पुकारा,

करदो दया मुझपे हूँ ग़म का मारा,

कहे सोनू होता ना मुझसे सबर है,

विष पीने वाले छुपा तू किधर है,

ओ विष पीने वाले छुपा तू किधर है,

मेरी जिंदगी में ग़मों का ज़हर है,

विष पीने वाले छुपा तू किधर है,

ओ विष पीने वाले छुपा तू किधर है ॥

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ऐसी सुबह ना आए, आए ना ऐसी शाम (Aisi Suwah Na Aye, Aye Na Aisi Sham)

शिव है शक्ति, शिव है भक्ति, शिव है मुक्ति धाम।
शिव है ब्रह्मा, शिव है विष्णु, शिव है मेरा राम॥

त्रिपुर भैरवी जयंती पर कौन सा पाठ करें?

हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल त्रिपुर भैरवी जयंती 15 दिसंबर को मनाई जाएगी। यह दिन मां काली को समर्पित है, जो शक्ति और सामर्थ्य की प्रतीक हैं। मां काली की पूजा शास्त्रों में बहुत ही फलदायी मानी गई है।

वृश्चिक संक्रांति की पूजा विधि

संक्रांति मतलब सूर्य का एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करना और इसका वृश्चिक राशि में प्रवेश वृश्चिक संक्रांति कहलाता है। यह दिन सूर्य देव की विशेष पूजा और दान करने के लिए शुभ है और व्यक्ति के भाग्योदय में होता है।

झंडा बजरंग बली का (Jhanda Bajrangbali Ka)

लहर लहर लहराए रे,
झंडा बजरंग बली का,

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