डाल रही वरमाला अब तो जानकी (Daal Rahi Varmala Ab To Janaki)

डाल रही वरमाला अब तो जानकी,

धनुष तोड़ा शिव जी का,

श्री राम जी ने,

जनक नंदनी मन में हर्षा गई है,

विधाता मेरी पूर्ण की कामनाएं,

ख़ुशी की सुहानी घड़ी आ गई है ॥


डाल रही वरमाला अब तो जानकी,

जय बोलो जय बोलो सीताराम की,

फूलों की बारिश यहाँ पे हो रही,

कृपा हो गई आज श्री भगवान की,

डाल रहीं वरमाला अब तो जानकी,

जय बोलो जय बोलो सीताराम की ॥


अब जनक की पूर्ण अभिलाषा हुई सारी,

मिट गया संताप जबसे दिल में था भारी,

डाल वरमाला सिया ने राम पाए है,

आज सखियों ने भी मंगल गीत गाए है,

महीमा अपरंपार इनके नाम की,

जय बोलो जय बोलो सीताराम की,

डाल रहीं वरमाला अब तो जानकी,

जय बोलो जय बोलो सीताराम की ॥


वेद मंत्रो की ध्वनि अब गूँजने लगी,

इस खुशी में देवीयां सब झुमने लगी,

आज शुभ दिन हम सभी के जीवन में आया,

सियाराम के नाम से हर दिल है मुस्काया,

‘हेमा’ रामायण है स्वाभिमान की,

जय बोलो जय बोलो सीताराम की,

डाल रहीं वरमाला अब तो जानकी,

जय बोलो जय बोलो सीताराम की ॥


डाल रहीं वरमाला अब तो जानकी,

जय बोलो जय बोलो सीताराम की,

फूलों की बारिश यहाँ पे हो रही,

कृपा हो गई आज श्री भगवान की,

डाल रहीं वरमाला अब तो जानकी,

जय बोलो जय बोलो सीताराम की ॥

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मासिक दुर्गाष्टमी तिथि और शुभ-मुहूर्त

प्रत्येक महीने की अष्टमी तिथि को मासिक दुर्गाष्टमी मनाई जाती है। इस दिन देवी दुर्गा की पूजा अर्चना की जाती है। धार्मिक मत है कि जगत की देवी मां दुर्गा के चरण और शरण में रहने से साधक को सभी प्रकार के सुखों मिलते हैं।

कब है रुक्मिणी अष्टमी?

हिंदू धर्म में पौष मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रुक्मिणी अष्टमी के रूप में मनाया जाता है। यह पर्व भगवान श्री कृष्ण की पत्नी देवी रुक्मिणी को समर्पित है, जिन्हें माता लक्ष्मी का अवतार माना जाता है। मान्यताओं के अनुसार, रुक्मिणी अष्टमी पर ही द्वापर युग में विदर्भ के महाराज भीष्मक के यहां देवी रुक्मिणी जन्मी थीं।

पौष माह के व्रत त्योहार

पंचांग के अनुसार, मार्गशीर्ष के बाद पौष का महीना आता है। ये हिंदू कैलेंडर का 10वां महीना होता है। पौष के महीने में सूर्य देव की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है।

तेरे नाम का दीवाना, तेरे द्वार पे आ गया है: भजन (Tere Naam Ka Diwana Tere Dwar Pe Aa Gaya Hai)

तेरे नाम का दीवाना,
तेरे द्वार पे आ गया है,

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