डमरू बजाए अंग भस्मी रमाए (Damru Bajaye Ang Bhasmi Ramaye)

डमरू बजाए अंग भस्मी रमाए,

और ध्यान लगाए किसका,

ना जाने वो डमरू वाला,

ना जाने वो डमरू वाला,

सब देवो में सब देवों में,

है वो देव निराला,

डमरू बजाए अंग भस्मी रमाये,

और ध्यान लगाए किसका ॥


मस्तक पे चंदा,

जिसकी जटा में है गंगा,

रहती पार्वती संग में,

सवारी है बूढ़ा नंदा,

है नंदा,

वो कैलाशी है अविनाशी,

पहने सर्पो की माला,

डमरू बजाए अंग भस्मी रमाये,

और ध्यान लगाए किसका ॥


बाघम्बर धारी,

वो है भोला त्रिपुरारी,

रहता है वो मस्त सदा,

जिसकी महिमा है भारी,

है न्यारी,

वो शिव शंकर है प्रलयंकर,

रहता सदा मतवाला,

डमरू बजाए अंग भस्मी रमाये,

और ध्यान लगाए किसका ॥


सारे मिल गायें,

शिव शम्भू को ध्याये,

जो भी मांगे सो पाए,

दर से खाली ना जाए,

जो आए,

बड़ा है दानी बड़ा ही ज्ञानी,

सारे जग का रखवाला,

डमरू बजाए अंग भस्मी रमाये,

और ध्यान लगाए किसका ॥


डमरू बजाए अंग भस्मी रमाए,

और ध्यान लगाए किसका,

ना जाने वो डमरू वाला,

ना जाने वो डमरू वाला,

सब देवो में सब देवों में,

है वो देव निराला,

डमरू बजाए अंग भस्मी रमाये,

और ध्यान लगाए किसका ॥

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कैसे दर आऊं, मैं तेरे दरश पाने को (Kaise Dar Aau Main Tere Darash Pane Ko)

कैसे दर आऊं,
मैं तेरे दरश पाने को,

मैं कितना अधम हूँ, ये तुम ही जानो (Main Kitna Adham Hu Ye Tum Hi Jano)

मैं कितना अधम हूँ,
ये तुम ही जानो,

बालाजी ने ध्याले तू: भजन (Balaji Ne Dhyale Tu)

मंगलवार शनिवार,
बालाजी ने ध्याले तू,

रविवार की पूजा विधि

हिंदू धर्म में रविवार का दिन विशेष रूप से भगवान सूर्यदेव से जुड़ा हुआ है। इसे "रविवार व्रत" या "सूर्य व्रत" के रूप में मनाया जाता है। रविवार को सूर्य देव की पूजा करने से जीवन में स्वास्थ्य, समृद्धि, सम्मान और शक्ति की प्राप्ति होती है।

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