देवों के देव है ये, महादेव कहलाते है (Devon Ke Dev Hai Ye Mahadev Kahlate Hai)

सबको अमृत बांटे,

खुद विष पि जाते है,

देवों के देव है ये,

महादेव कहलाते है ॥


ये औघड़ दानी है,

संग मात भवानी है,

दुनिया दीवानी है,

ये डमरू बजाते है,

देवो के देव है ये,

महादेव कहलाते है ॥


माथे पर है चंदा,

और जटा में है गंगा,

कटे चौरासी फंदा,

जो इनका ध्यान लगाते है,

देवो के देव है ये,

महादेव कहलाते है ॥


गले सर्पो की माला,

तन पे है मृगछाला,

पि के भंग का प्याला,

ये भस्म रमाते है,

देवो के देव है ये,

महादेव कहलाते है ॥


शिव शंकर भोलेनाथ,

रख दो मेरे सिर पे हाथ,

दे दो ‘वशिष्ठ’ का साथ,

हम तुम्हे मनाते है,

देवो के देव है ये,

महादेव कहलाते है ॥


सबको अमृत बांटे,

खुद विष पि जाते है,

देवों के देव है ये,

महादेव कहलाते है ॥

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विसर्जन को चलीं रे, चली रे मोरी मैया (Visarjan Ko Chali Re Chali Mori Maiya)

विसर्जन को चली रे,
चली रे मोरी मैया,

जय जय शिव ओंकारा, हर हर शिव ओंकारा (Jay Jay Shiv Omkara Har Har Shiv Omkara)

ओम जय शिव ओंकारा,
हर हर शिव ओंकारा,

वायुदेव की पूजा विधि क्या है

सनातन धर्म में वायु देवता बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं। वेदों में इनका कई बार वर्णन मिलता है और इन्हें भीम का पिता और हनुमान के आध्यात्मिक पिता माना जाता है। वायु पांच तत्वों (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश) में से एक है और इसे जीवन का आधार माना जाता है।

मकर संक्रांति पर सूर्य को अर्घ्य कैसे दें

हिंदू धर्म में मकर संक्रांति को सूर्यदेव की उपासना और शनिदोष से मुक्ति के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है। इस दिन सूर्यदेव अपने पुत्र शनिदेव के घर आते हैं। वैदिक ज्योतिष के अनुसार, साल में 12 संक्रांतियां होती हैं।

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