ढोलिडा ढोल रे वगाड़ (Dholida Dhol Re Vagad)

ढोलिडा ढोल रे वागाड़,

मारे हिंच लेवी छे,

हिच लेवी छे,

हामे जापे जावा से,

हिच लेवी छे,

हामे जापे जावा से,

ढोलिडा ,,,,,,,,,

ढोलिडा ढोल रे वगाड़,

मारे हिंच लेवी छे,

ढोलिडा ढोल रे वगाड़,

मारे हिंच लेवी छे ॥


तारे किया भाई ने जोगळे,

हवे हिच लेवी छे,

तारे किया भाई ने जोगळे,

हवे हिच लेवी छे,

म्हारा सायबा तारी जोगळे,

मारे हिच लेवी छे,

म्हारा सायबा तारी जोगळे,

मारे हिच लेवी छे,

तारा ढोल नी माते,

डांडियों पड़े ने,

मारा हिवड़ा लेवे जाए,

मारा हिवड़ा लेवे जाए,

मारा दिलड़ा लेवे जाए,

ढोलिडा ,,,,,,,,,

ढोलिडा ढोल रे वगाड़,

मारे हिंच लेवी छे ॥


तारे किया भाई ने डांडिये,

हवे हिच लेवी छे,

तारे किया भाई ने डांडिये,

हवे हिच लेवी छे,

म्हारा सायबा तारी डांडिये,

हवे हिच लेवी छे,

म्हारा सायबा तारी डांडिये,

मारे हिच लेवी छे,

तारा ढोल नी माते,

जद डांडियों पड़े ने,

मारा हिवड़ा लेवे जाए,

मारा हिवड़ा लेवे जाए,

मारा दिलड़ा लेवे जाए,

ढोलिडा ,,,,,,,,,

ढोलिडा ढोल रे वगाड़,

मारे हिंच लेवी छे ॥


तारे किया भाई ने देशे,

हवे हिच लेवी छे,

तारे किया भाई ने देशे,

हवे हिच लेवी छे,

म्हारा सायबा तारी देशे,

हवे हिच लेवी छे,

म्हारा सायबा तारी देशे,

मारे हिच लेवी छे,

तारा ढोल नी माते,

जद डांडियों पड़े ने,

मारा हिवड़ा लेवे जाए,

मारा हिवड़ा लेवे जाए,

मारा दिलड़ा लेवे जाए,

ढोलिडा ,,,,,,,,,

ढोलिडा ढोल रे वगाड़,

मारे हिंच लेवी छे ॥


ढोलिडा ढोल रे वागाड़,

मारे हिंच लेवी छे,

हिच लेवी छे,

हामे जापे जावा से,

हिच लेवी छे,

हामे जापे जावा से,

ढोलिडा ,,,,,,,,,

ढोलिडा ढोल रे वगाड़,

मारे हिंच लेवी छे,

ढोलिडा ढोल रे वगाड़,

मारे हिंच लेवी छे ॥

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तुम बिन मोरी कौन खबर ले गोवर्धन गिरधारी(Tum Bin Mori Kaun Khabar Le Govardhan Girdhari)

तुम बिन मोरी कौन खबर ले,
गोवर्धन गिरधारी,

अन्वाधान व इष्टि क्या है

सनातन हिंदू धर्म में, अन्वाधान व इष्टि दो प्रमुख अनुष्ठान हैं। जिसमें भक्त अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए किया करते हैं। इसमें प्रार्थना व पूजा कुछ समय के लिए यानी छोटी अवधि के लिए ही की जाती है।

मासिक जन्माष्टमी के उपाय

2025 में इस साल की पहली मासिक कृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाएगी। भक्तों के लिए भगवान श्री कृष्ण को प्रसन्न करने के लिए यह एक उत्तम तिथि और अवसर मानी जाती है।

गणगौर व्रत की पौराणिक कथा

गणगौर व्रत चैत्र शुक्ल तृतीया को मनाया जाता है, जिसे गौरी तृतीया के नाम से भी जाना जाता है। इस व्रत का विशेष महत्व विवाहित और अविवाहित महिलाओं के लिए होता है।

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