दुख हर्ता बनके, सुखकर्ता बनके, चले आना(Dukhharta Banke Sukhkarta Banke Chale Aana)

दुखहर्ता बनके,

सुखकर्ता बनके,

चले आना,

गणपति चले आना ॥


तुम विघ्न विनाशक आना,

तुम विघ्न विनाशक आना,

इक्छा पूरी करो,

हाथ सर पे धरो,

चले आना,

गणपति चले आना,

दुख हर्ता बनके,

सुखकर्ता बनके,

चले आना,

गणपति चले आना ॥


तुम अष्टविनायक आना,

तुम अष्टविनायक आना,

मोदक हाथ लेके,

खुशियां साथ लेके,

चले आना,

गणपति चले आना,

दुख हर्ता बनके,

सुखकर्ता बनके,

चले आना,

गणपति चले आना ॥


तुम भाग्य विधाता आना,

तुम भाग्य विधाता आना,

रिद्धि साथ लेके,

सिद्धि साथ लेके,

चले आना,

गणपति चले आना,

दुख हर्ता बनके,

सुखकर्ता बनके,

चले आना,

गणपति चले आना ॥


तुम गौरी नन्दन आना,

तुम गौरी नन्दन आना,

वर्षा दया की करो,

दुःख सबके हरो,

चले आना,

गणपति चले आना,

दुखहर्ता बनके,

सुखकर्ता बनके,

चले आना,

गणपति चले आना ॥


तुम मंगल मूरत आना,

तुम मंगल मूरत आना,

आस तोड़े नहीं,

साथ छोड़ो नहीं,

चले आना,

गणपति चले आना,

दुखहर्ता बनके,

सुखकर्ता बनके,

चले आना,

गणपति चले आना ॥

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फाल्गुन अमावस्या की कथा

फाल्गुन अमावस्या का दिन पितृों को समर्पित होता है। इस दिन उनका पिंडदान करना चाहिए। इस दिन से जुड़ी कई कथाएं भी है।

मुरली वाले ने घेर लयी, अकेली पनिया गयी (Murli Wale Ne Gher Layi)

मुरली वाले ने घेर लयी
अकेली पनिया गयी ॥

मेरा हाथ पकड़ ले रे, कान्हा (Mera Haath Pakad Le Re, Kanha)

मेरा हाथ पकड़ ले रे,
कान्हा दिल मेरा घबराये,

भीष्म अष्टमी कब है, शुभ मुहूर्त एवं योग

माघ मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को भीष्म अष्टमी मनाई जाती है। कहा जाता है कि इसी दिन बाणों की शय्या पर लेटे भीष्म पितामह ने अपने प्राण त्याग किए थे। इसलिए सनातन धर्म में यह तिथि अत्यंत शुभ मानी गई है।

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