घुमतड़ा घर आवो, ओ म्हारा प्यारा गजानन (Ghumta Ghar Aao Mhara Pyara Gajanan)

घुमतड़ा घर आवो,

ओ म्हारा प्यारा गजानन,

खेलतड़ा घर आवो,

ओ म्हारा प्यारा गजानन ॥


ब्रम्हा पधारो विष्णु पधारो देवा,

संग में ले आना सरस्वती को,

ओ म्हारा प्यारा गजानन,

घुमतड़ा घर आवों,

ओ म्हारा प्यारा गजानन ॥


राम पधारो लक्ष्मण पधारो देवा,

संग में ले आना सीता सती को,

ओ म्हारा प्यारा गजानन,

घुमतड़ा घर आवों,

ओ म्हारा प्यारा गजानन ॥


डमरू बजावत शिव जी पधारो देवा,

संग में ले आना पारवती को,

ओ म्हारा प्यारा गजानन,

घुमतड़ा घर आवों,

ओ म्हारा प्यारा गजानन ॥


सिंह चढ़त माँ आवो भवानी,

संग में ले आना नव दुर्गा को,

ओ म्हारा प्यारा गजानन,

घुमतड़ा घर आवों,

ओ म्हारा प्यारा गजानन ॥


मुरली बजावत कृष्ण पधारो देवा,

संग में ले आना राधा रुक्मण को,

ओ म्हारा प्यारा गजानन,

घुमतड़ा घर आवों,

ओ म्हारा प्यारा गजानन ॥


बाई मीरा कहे प्रभु गिरधर नागर,

देना हमको प्रेम भक्ति हो,

ओ म्हारा प्यारा गजानन,

घुमतड़ा घर आवों,

ओ म्हारा प्यारा गजानन ॥


घुमतड़ा घर आवो,

ओ म्हारा प्यारा गजानन,

खेलतड़ा घर आवो,

ओ म्हारा प्यारा गजानन ॥

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उगादी त्योहार क्यों मनाया जाता है

उगादि दक्षिण भारत में एक महत्वपूर्ण नववर्ष उत्सव होता है। "उगादि" शब्द संस्कृत के "युग" अर्थात् "युग की शुरुआत" और "आदि" अर्थात् "आरंभ" से मिलकर बना है, जिसका अर्थ होता है नए युग का आरंभ।

मैं परदेशी हूं, पहली बार आया हूं (Main Pardesi Hoon Pehli Baar Aaya Hoon)

हो मैं परदेशी हूं, पहली बार आया हूं।
मैं परदेशी हूं, पहली बार आया हूं।

मेरे बाबा मेरे महाकाल: शिव भजन (Mere Baba Mere Mahakal)

देवों के महादेव है कालों के ये काल,
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साँवरियो है सेठ, म्हारी राधा जी सेठाणी है(Sanwariyo Hai Seth Mhari Radha Ji Sethani Hai)

साँवरियो है सेठ,
म्हारी राधा जी सेठाणी है,

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