हे शिव शम्भू करुणा सिंधु(Hey Shiv Shambhu Karuna Sindhu)

हे शिव शम्भू करुणा सिंधु,

जग के पालनहार,

दयालु वंदन बारम्बार,

दयालु वंदन बारम्बार ॥


त्रिलोकी है नाम तुम्हारा,

त्रिलोकी है नाम तुम्हारा,

तेरी दया से जग से उजियारा,

तेरी दया से जग से उजियारा,

कण कण में है वास तुम्हारा,

कण कण में है वास तुम्हारा,

करुणा के भंडार,

दयालु वंदन बारम्बार,

दयालु वंदन बारम्बार ॥


सारे जग के तुम हो स्वामी,

सारे जग के तुम हो स्वामी,

हे जगपालक अंतर्यामी,

हे जगपालक अंतर्यामी,

सियाराम का ध्यान धरे तू,

सियाराम का ध्यान धरे तू,

गिरिजा के भरतार,

दयालु वंदन बारम्बार,

दयालु वंदन बारम्बार ॥


‘हर्ष’ कहूँ क्या तेरी माया,

‘हर्ष’ कहूँ क्या तेरी माया,

तूने ये ब्रम्हांड रचाया,

तूने ये ब्रम्हांड रचाया,

तेरे नाम से हम दीनो का,

तेरे नाम से हम दीनो का,

चलता है संसार,

दयालु वंदन बारम्बार,

दयालु वंदन बारम्बार ॥


हे शिव शम्भू करुणा सिंधु,

जग के पालनहार,

दयालु वंदन बारम्बार,

दयालु वंदन बारम्बार ॥

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भटकूं क्यों मैं भला, संग मेरे है सांवरा (Bhatku Kyun Main Bhala Sang Mere Hai Sanwara)

भटकूं क्यों मैं भला,
संग मेरे है सांवरा,

मोहे लागी लगन गुरु चरणन की(Mohe Lagi Lagan Guru Charanan Ki)

अखंड-मंडलाकारं
व्याप्तम येन चराचरम

पापमोचनी एकादशी व्रत कथा

पापमोचनी एकादशी चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाती है। इस व्रत में भगवान विष्णु की पूजा की जाती है, और शास्त्रों के अनुसार, इसे पापों से मुक्ति दिलाने वाला बताया गया है।

हे वीणा वादिनी सरस्वती, हंस वाहिनी(Hey Veena Vadini Saraswati Bhajan)

हे वीणा वादिनी सरस्वती
हंस वाहिनी सरस्वती

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