जय जय जननी श्री गणेश की (Jai Jai Janani Shri Ganesh ki)

जय जय जननी श्री गणेश की

जय जय जननी श्री गणेश की

प्रतीभा परमेश्वर परेश की

प्रतीभा परमेश्वर परेश की

जय जय जननी श्री गणेश की


जय महेश मुख चंन्द्र चंन्द्रीका

जय जय जय जय जगत अंबीका

जय महेश मुख चंन्द्र चंन्द्रीका

जय जय जय जय जगत अंबीका


वर दे माँ वरदान दायनी

वर दे माँ वरदान दायनी

बनु दायकी द्वारीकेश

जय जय जननी श्री गणेश की


शविनय विनती सुन हरी आये

आये अपनाये ले जाये

शविनय विनती सुन हरी आये

आये अपनाये ले जाये


सुखद सुखद बेना आये माँ

सुखद सुखद बेना आये माँ

सर्व सुमंगल ग्रीह पर्वेश की

सर्व सुमंगल ग्रीह पर्वेश की

जय जय जननी श्री गणेश की


प्रतीभा परमेश्वर परेश की

जय जय जननी श्री गणेश की

जय जय जननी श्री गणेश की

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किस विधि वंदन करू तिहारो(Kis Vidhi Vandan Karun Tiharo Aughardani)

किस विधि वंदन करू तिहारो,
औघड़दानी त्रिपुरारी

जरा चलके अयोध्या जी में देखों (Jara Chalke Ayodhya Ji Me Dekho)

जरा चल के अयोध्या जी में देखो,
राम सरयू नहाते मिलेंगे ॥

मेरी माँ अंबे दुर्गे भवानी(Meri Maa Ambe Durga Bhawani)

मेरी माँ अंबे दुर्गे भवानी,
किस जगह तेरा जलवा नहीं है,

माघ महीने में कब और क्यों मनाई जाती है कुंभ संक्रांति?

आत्मा के कारक सूर्य देव हर महीने एक राशि से दूसरी राशि में संक्रमण करते हैं। सूर्य देव के इस राशि परिवर्तन को ही संक्रांति कहते हैं। हर संक्रांति का अपना खास महत्व होता है और इसे धूमधाम से मनाया जाता है।

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