जय जय जननी श्री गणेश की (Jai Jai Janani Shri Ganesh ki)

जय जय जननी श्री गणेश की

जय जय जननी श्री गणेश की

प्रतीभा परमेश्वर परेश की

प्रतीभा परमेश्वर परेश की

जय जय जननी श्री गणेश की


जय महेश मुख चंन्द्र चंन्द्रीका

जय जय जय जय जगत अंबीका

जय महेश मुख चंन्द्र चंन्द्रीका

जय जय जय जय जगत अंबीका


वर दे माँ वरदान दायनी

वर दे माँ वरदान दायनी

बनु दायकी द्वारीकेश

जय जय जननी श्री गणेश की


शविनय विनती सुन हरी आये

आये अपनाये ले जाये

शविनय विनती सुन हरी आये

आये अपनाये ले जाये


सुखद सुखद बेना आये माँ

सुखद सुखद बेना आये माँ

सर्व सुमंगल ग्रीह पर्वेश की

सर्व सुमंगल ग्रीह पर्वेश की

जय जय जननी श्री गणेश की


प्रतीभा परमेश्वर परेश की

जय जय जननी श्री गणेश की

जय जय जननी श्री गणेश की

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गजरा गिर गया जमुना जल में (Gajara Gir Gaya Jamuna Jal Me)

जमुना के तट पर,
मारी नजरिया ऐसी सांवरिया ने,

कैला देवी चालीसा (Kaila Devi Chalisa)

जय जय कैला मात हे, तुम्हे नमाउ माथ ॥
शरण पडूं में चरण में, जोडूं दोनों हाथ ॥

गोविन्द जय-जय, गोपाल जय-जय(Govind Jai Jai, Gopal Jai Jai)

गोविन्द जय-जय, गोपाल जय-जय
राधा-रमण हरि, गोविन्द जय-जय ॥ १ ॥

पापमोचनी एकादशी व्रत कथा

पापमोचनी एकादशी चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाती है। इस व्रत में भगवान विष्णु की पूजा की जाती है, और शास्त्रों के अनुसार, इसे पापों से मुक्ति दिलाने वाला बताया गया है।

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