गोविन्द जय-जय, गोपाल जय-जय(Govind Jai Jai, Gopal Jai Jai)

गोविन्द जय-जय, गोपाल जय-जय ।

राधा-रमण हरि, गोविन्द जय-जय ॥ १ ॥

॥ गोविन्द जय-जय... ॥


ब्रह्माकी जय-जय, विष्णूकी जय-जय ।

उमा- पति शिव शंकरकी जय-जय ॥ २ ॥

॥ गोविन्द जय-जय... ॥


राधाकी जय-जय, रुक्मिणिकी जय-जय ।

मोर-मुकुट वंशीवारेकी जय-जय ॥ ३ ॥

॥ गोविन्द जय-जय... ॥


गंगाकी जय-जय, यमुनाकी जय-जय ।

सरस्वती, तिरवेणीकी जय-जय ॥ ४ ॥

॥ गोविन्द जय-जय... ॥


रामकी जय-जय श्यामकी जय-जय ।

दशरथ-कुँवर चारों भैयों की जय-जय ॥ ५ ॥

॥ गोविन्द जय-जय... ॥


कृष्णाकी जय-जय, लक्ष्मीकी जय-जय ।

कृष्ण-बलदेव दोनों भइयोंकी जय-जय ॥ ६ ॥


गोविन्द जय-जय, गोपाल जय-जय ।

राधा-रमण हरि, गोविन्द जय-जय ॥

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तुम राम के पुजारी, हो बाल ब्रम्हचारी(Tum Ram Ke Pujari Ho Bal Brahmachari)

तुम राम के पुजारी,
हो बाल ब्रम्हचारी,

मात अंग चोला साजे (Maat Ang Chola Saje Har Rang Chola Saje)

हे माँ, हे माँ, हे माँ, हे माँ

पकड़ लो हाथ बनवारी (Pakad Lo Hath Banwari)

पकड़ लो हाथ बनवारी,
नहीं तो डूब जाएंगे,

नरसिंह द्वादशी के उपाय

हिन्दू पंचांग के अनुसार, फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी के दिन नरसिंह द्वादशी का पर्व मनाया जाता है जो कि इस साल 10 मार्च 2025, फाल्गुन, शुक्ल द्वादशी को पड़ रहा है।

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