जय माता दी बोल भगता, चिट्ठी माँ की आएगी (Jai Mata Di Bol Bhagta Chitthi Maa Ki Aayegi)

जय माता दी बोल भगता,

चिट्ठी माँ की आएगी,

जाग जगराते में,

माँ तेरे भाग्य जगाएगी,

दिल से जो पुकारेगा,

देर ना लगाएगी,

जाग जगराते में,

माँ तेरे भाग्य जगाएगी,

जय माता दीं बोल भगता ॥


इस ज्योत में वास माँ वैष्णो का,

देखे वो जो दास माँ वैष्णो का,

तू ज्योत से ज्योत मन की मिला ले,

फिर देख परकाश माँ वैष्णो का,

झोली मुरादों से भर जाएगी,

जय माता दीं बोल भगता,

चिट्ठी माँ की आएगी,

जाग जगराते में,

माँ तेरे भाग्य जगाएगी,

जय माता दीं बोल भगता ॥


हर साँस रंग ले तू मैया के रंग में,

गा माँ की भेंटे तू भक्तो के संग में,

तुझपे भी रहमत माँ बरसाएगी,

जय माता दीं बोल भगता,

चिट्ठी माँ की आएगी,

जाग जगराते में,

माँ तेरे भाग्य जगाएगी,

जय माता दीं बोल भगता ॥


एक रात दाती के अर्पण तू कर दे,

सर को झुका के समर्पण तू कर दे,

किस्मत सवेरे संवर जाएगी,

जय माता दीं बोल भगता,

चिट्ठी माँ की आएगी,

जाग जगराते में,

माँ तेरे भाग्य जगाएगी,

जय माता दीं बोल भगता ॥


‘संदीप’ एक दिप ऐसा जला ले,

जिसमे हो विश्वास वाले उजाले,

तुझ पे भी माँ की नजर जाएगी,

जय माता दीं बोल भगता,

चिट्ठी माँ की आएगी,

जाग जगराते में,

माँ तेरे भाग्य जगाएगी,

जय माता दीं बोल भगता ॥


जय माता दी बोल भगता,

चिट्ठी माँ की आएगी,

जाग जगराते में,

माँ तेरे भाग्य जगाएगी,

दिल से जो पुकारेगा,

देर ना लगाएगी,

जाग जगराते में,

माँ तेरे भाग्य जगाएगी,

जय माता दीं बोल भगता ॥

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मत्स्य द्वादशी कब है

भगवान विष्णु के 24 अवतारों में से एक मत्स्य अवतार की जयंती के रूप में मनाया जाने वाला मत्स्य द्वादशी पर्व इस साल दिसंबर में मनाया जाएगा। यह पर्व मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को मनाया जाता है ।

थारो खूब सज्यो दरबार, म्हारा बालाजी सरकार (Tharo Khub Sajyo Darbar Mhara Balaji Sarkar)

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गणेश चतुर्थी व्रत कथा

गणेश चतुर्थी को गणपति जी के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। इस दिन संपूर्ण विधि-विधान के साथ घर में एक दिन, दो दिन, तीन दिन या फिर 9 दिनों के लिए गणेश जी की स्थापना की जाती है।

होली पर गुजिया क्यों बनाई जाती है

हर घर में होली के मौके पर गुजिया बनाई और खाई जाती है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि होली पर गुजिया बनाने की परंपरा क्यों है? इसके पीछे एक दिलचस्प पौराणिक कथा और ऐतिहासिक महत्व छिपा हुआ है। तो आइए जानते हैं कि होली पर गुजिया क्यों बनाई जाती है और इसके पीछे की कहानियां क्या हैं।

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