जय रघुनन्दन, जय सिया राम (Jai Raghunandan Jai Siya Ram Bhajan)

जय रघुनन्दन, जय सिया राम ।

भजमन प्यारे, जय सिया राम ।


जय रघुनन्दन, जय सिया राम ।

भजमन प्यारे, जय सिया राम ।


आदि राम, अनंत है राम ।

सत चित और, अनंत है राम ।

जय रघुनन्दन, जय सिया राम ॥


हनुमान के स्वामी राम ।

दीनन के दुःख हारी राम ।

जय रघुनन्दन, जय सिया राम ॥


मर्यादा पुर्शोतम राम ।

पूरण ब्रम्ह सनातन राम ।

जय रघुनन्दन, जय सिया राम ॥


तुलसी सुत तुलसी के राम ।

करुना कर भक्तों के राम ।

जय रघुनन्दन, जय सिया राम ॥


जय सिया राम जय जय सिया राम


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भीष्म पितामह का अंतिम संस्कार

माघ मास में शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को भीष्म द्वादशी कहते हैं। इसे तिल द्वादशी भी कहते हैं। भीष्म द्वादशी को माघ शुक्ल द्वादशी नाम से भी जाना जाता है।

चैत्र में चंद्र दर्शन के मुहूर्त

हिंदू धर्म में चंद्रमा को देवता समान माना जाता है और उनकी पूजा करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है। चंद्र दर्शन का विशेष महत्व अमावस्या के बाद पहली बार चंद्रमा के दर्शन करने से जुड़ा हुआ है।

करती हूँ तुम्हारा व्रत मैं - माँ संतोषी (Karti Hu Tumhara Vrat Main)

करती हूँ तुम्हारा व्रत मैं,
स्वीकार करो माँ,

अनंग त्रयोदशी के दिन प्रेमी जोड़ों के लिए विशेष उपाय

अनंग त्रयोदशी व्रत हर साल मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। यह दिन विशेष रूप से प्रेम और दांपत्य जीवन के लिए महत्व रखता है।

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