जिनके हृदय श्री राम बसे(Jinke Hridey Shri Ram Base)

जिनके हृदय श्री राम बसे,

उन और को नाम लियो ना लियो ।

जिनके हृदय श्री राम बसे,

उन और को नाम लियो ना लियो ।

जिनके हृदय श्री राम ।


कोई मांगे कंचन सी काया,

कोई मांग रहा प्रभु से माया ।

कोई पुण्य करे, कोई दान करे,

कोई दान का रोज बखान करे ।

जिन कन्या धन को दान दियो,

जिन कन्या धन को दान दियो,

उन और को दान दियो ना दियो ॥


जिनके हृदय श्री राम बसे,

उन और को नाम लियो ना लियो ।

जिनके हृदय श्री राम ।


कोई घर में बैठा नमन करे,

कोई हरि मंदिर में भजन करे ।

कोई गंगा यमुना स्नान करे,

कोई काशी जाके ध्यान धरे ।

जिन मात पिता की सेवा की,

जिन मात पिता की सेवा की,

उन तीर्थ स्नान किओ ना किओ ॥


जिनके हृदय श्री राम बसे,

उन और को नाम लियो ना लियो ।

जिनके हृदय श्री राम ।

........................................................................................................
जगन्नाथ रथ यात्रा क्यों मानते हैं

सनातन धर्म में हिंदू वैदिक पंचांग के अनुसार, हर साल आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को भगवान जगन्नाथ की भव्य रथ यात्रा निकाली जाती है। इस यात्रा को रथ महोत्सव और गुंडिचा यात्रा के नाम से भी जाना जाता है।

शिव उठत, शिव चलत, शिव शाम-भोर है। (Shiv Uthat Shiv Chalat Shiv Sham Bhor Hai)

शिव उठत, शिव चलत, शिव शाम-भोर है।
शिव बुद्धि, शिव चित्त, शिव मन विभोर है॥ ॐ ॐ ॐ...

माँ देख तेरा श्रृंगार, करे दिल नाचण का(Ma Dekh Tera Shringar Kare Dil Nachan Ka)

माँ देख तेरा श्रृंगार,
करे दिल नाचण का,

सदाशिव सर्व वरदाता, दिगम्बर हो तो ऐसा हो (Sada Shiv Sarva Var Data Digamber Ho To Aisa Ho)

सदाशिव सर्व वरदाता,
दिगम्बर हो तो ऐसा हो ।

डिसक्लेमर

'इस लेख में दी गई जानकारी/सामग्री/गणना की प्रामाणिकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। सूचना के विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/धार्मिक मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संकलित करके यह सूचना आप तक प्रेषित की गई हैं। हमारा उद्देश्य सिर्फ सूचना पहुंचाना है, पाठक या उपयोगकर्ता इसे सिर्फ सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त इसके किसी भी तरह से उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता या पाठक की ही होगी।