जो करते रहोगे भजन धीरे धीरे (Jo Karte Rahoge Bhajan Dhire Dhire)

जो करते रहोगे भजन धीरे धीरे ।

तो मिल जायेगा वो सजन धीरे धीरे ।


जो करते रहोगे भजन धीरे धीरे ।

तो मिल जायेगा वो सजन धीरे धीरे ।


अगर उनसे मिलने की दिल में तमन्ना ।

अगर प्रभु से मिलने की दिल में तमन्ना ।

अगर हरी से मिलने की दिल में तमन्ना ।

करो शुद्ध अन्तःकरन धीरे धीरे ।


जो करते रहोगे भजन धीरे धीरे ।

तो मिल जायेगा वो सजन धीरे धीरे ॥


कोई काम दुनिया में मुश्किल नहीं है ।

जो करते रहोगे यतन धीरे धीरे ।


जो करते रहोगे भजन धीरे धीरे ।

तो मिल जायेगा वो सजन धीरे धीरे ॥


करो प्रेम से भक्ति सेवा हरी की ।

करो प्रेम से भक्ति पूजा हरी की ।

तो मिल जायेगा वो रतन धीरे धीरे ।


जो करते रहोगे भजन धीरे धीरे ।

तो मिल जायेगा वो सजन धीरे धीरे ॥


जो करते रहोगे भजन धीरे धीरे ।

तो मिल जायेगा वो सजन धीरे धीरे ।

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विरात्रा री पहाड़ियों में, धाम थारो - भजन (Viratra Ri Pahadiyon Me Dham Tharo)

विरात्रा री पहाड़ियों में,
धाम थारो म्हाने लागे न्यारो,

साँसों की माला पे सिमरूं मैं, पी का नाम(Sanso Ki Mala Pe Simru Main Pee Ka Naam)

साँसों की माला पे सिमरूं मैं, पी का नाम,
अपने मन की मैं जानूँ, और पी के मन की राम,

अमृत बेला गया आलसी सो रहा बन आभागा (Amrit Bela Geya Aalasi So Raha Ban Aabhaga)

बेला अमृत गया,
आलसी सो रहा बन आभागा,

स्कंद षष्ठी पारण विधि

हर माह की शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को स्कंद षष्ठी का पर्व मनाया जाता है। स्कंद देव यानी भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र कार्तिकेय की पूजा की जाती हैं।

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