जो सुमिरत सिधि होइ (Jo Sumirat Siddhi Hoi)

श्री रामायण प्रारम्भ स्तुति,

जो सुमिरत सिधि होइ गन नायक करिबर बदन ॥

करउ अनुग्रह सोइ बुद्धि रासि सुभ गुन सदन ॥ 1 ॥


मूक होइ बाचाल पंगु चढइ गिरिबर गहन ॥

जासु कृपाँ सो दयाल द्रवउ सकल कलि मल दहन ॥ 2 ॥


नील सरोरुह स्याम तरुन अरुन बारिज नयन ॥

करउ सो मम उर धाम सदा छीरसागर सयन ॥ 3 ॥


कुंद इंदु सम देह उमा रमन करुना अयन ॥

जाहि दीन पर नेह करउ कृपा मर्दन मयन ॥ 4 ॥


बंदउ गुरु पद कंज कृपा सिंधु नररूप हरि ॥

महामोह तम पुंज जासु बचन रबि कर निकर ॥ 5 ॥

........................................................................................................
सर्वपितृ अमावस्या: स्नान और पूजा विधि के साथ करें ये कार्य

पितृमोक्ष अमावस्या: इस तिथि को मनाई जाएगी आश्विन अमावस्या, महत्व के साथ जानिए क्या है दान कर्म का शुभ मुहूर्त..

स्कन्द षष्ठी पूजा विधि और उपाय

स्कन्द षष्ठी फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाने वाला त्योहार है। यह त्योहार भगवान कार्तिकेय को समर्पित है, जिसका हिंदू धर्म में खास महत्व है।

मेरी लाज बचा लो(Meri Laaj Bacha Lo)

कन्हैया आजा, आजा बंसी बजैया
हारे के साथी कहाते हो श्याम

होली आई रे होली आई रे(Holi Ae Re Holi Aae Re)

होली आई रे होली आई रे होली आई वृन्दावन खेले गोरी
भागन पे आयो है फागण महीना कभू प्रेम की होरी बईं न,

डिसक्लेमर

'इस लेख में दी गई जानकारी/सामग्री/गणना की प्रामाणिकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। सूचना के विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/धार्मिक मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संकलित करके यह सूचना आप तक प्रेषित की गई हैं। हमारा उद्देश्य सिर्फ सूचना पहुंचाना है, पाठक या उपयोगकर्ता इसे सिर्फ सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त इसके किसी भी तरह से उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता या पाठक की ही होगी।