कांच ही बांस के बहंगिया (Kaanch Hi Baans Ke Bahangiya)

कांच ही बांस के बहंगिया, 

बहंगी लचकति जाए।

बहंगी लचकति जाए।

बात जे पुछेले बटोहिया,

बेहंगी केकरा के जाए? 

बहंगी केकरा के जाए? 


तू त आन्हर हउवे रे बटोहिया, 

बहंगी छठी माई के जाए... 

बहंगी छठी माई के जाए... 

कांच ही बांस के बहंगिया, 

बहंगी लचकति जाए।

बहंगी लचकति जाए।


केरवा जे फरेला घवद से,

ओह पर सुगा मेंड़राय... 

ओह पर सुगा मेंड़राय... 

खबरी जनइबो अदित से 

सुगा देले जूठियाय 

सुगा देले जूठियाय... 

ऊ जे मरबो रे सुगवा धनुष से 

सुगा गिरे मुरछाय... 

सुगा गिरे मुरछाय... 

केरवा जे फरेला घवद से 

ओह पर सुगा मेंड़राय... 

ओह पर सुगा मेंड़राय… 


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नारायणी शरणम्(Narayani Sharanam)

नारायणी शरणम
दोहा – माँ से भक्ति है,

भोले बाबा का ये दर (Bhole Baba Ka Ye Dar)

भोले बाबा का ये दर,
भक्तों का बन गया है घर,

होली और रंगों का अनोखा रिश्ता

होली सिर्फ रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि ये खुशियां, प्रेम और भाईचारे का प्रतीक है। इस दिन लोग एक-दूसरे को रंग लगाते हैं और गिले-शिकवे भुलाकर त्योहार मनाते हैं। लेकिन क्या आपने ये कभी सोचा है कि होली पर रंग लगाने की परंपरा कैसे शुरू हुई? इसके पीछे एक पौराणिक कथा छिपी हुई है, जो भगवान श्रीकृष्ण और प्रह्लाद से जुड़ी है।

मैया बधाईं है बधाईं है (Maiya Badhai Hai Badhai Hai)

मैया बधाई है बधाई है,
बाबा बधाई है बधाई है,

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