कैसी यह देर लगाई दुर्गे... (Kaisi Yeh Der Lagayi Durge)

कैसी यह देर लगाई दुर्गे, हे मात मेरी हे मात मेरी।


भव सागर में घिरा पड़ा हूँ, काम आदि गृह में घिरा पड़ा हूँ।

मोह आदि जाल में जकड़ा पड़ा हूँ, हे मात मेरी हे मात मेरी॥


ना मुझ में बल है, ना मुझ में विद्या, ना मुझ ने भक्ति ना मुझ में शक्ति।

शरण तुम्हारी गिरा पड़ा हूँ, हे मात मेरी हे मात मेरी॥


ना कोई मेरा कुटुम्भ साथी, ना ही मेरा शरीर साथी।

आप ही उभारो पकड़ के बाहें, हे मात मेरी हे मात मेरी॥


चरण कमल की नौका बना कर, मैं पार हूँगा ख़ुशी मना कर।

यम दूतों को मार भगा कर, हे मात मेरी हे मात मेरी॥


सदा ही तेरे गुणों को गाऊं, सदा ही तेरे सरूप को धयाऊं।

नित प्रति तेरे गुणों को गाऊं, हे मात मेरी हे मात मेरी॥


ना मैं किसी का ना कोई मेरा, छाया है चारो तरफ अँधेरा।

पकड़ के ज्योति दिखा दो रास्ता, हे मात मेरी हे मात मेरी॥


शरण पड़े हैं हम तुम्हारी, करो यह नैया पार हमारी।

कैसी यह देरी लगाई है दुर्गे, हे मात मेरी हे मात मेरी॥

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राम नाम की लूट है (Ram Naam Ki Loot Hai)

श्री राम, जय राम, जय जय राम
श्री राम, जय राम, जय जय राम

राधाकृष्ण प्राण मोर युगल-किशोर( RadhaKrishn Prana Mora Yugal Kishor)

राधाकृष्ण प्राण मोर युगल-किशोर ।
जीवने मरणे गति आर नाहि मोर ॥

वैशाख कृष्ण बरूथिनी नाम एकादशी (Veshakh Krishn Barothini Naam Ekadashi)

भगवान् कृष्ण ने कहा- हे पाण्डुनन्दन ! अब मैं तुम्हें बरूथिनी एकादशी व्रत का माहात्म्य सुनाता हूँ सुनिये।

रवि प्रदोष व्रत विशेष योग

देवाधिदेव महादेव के लिए ही प्रदोष व्रत किया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि प्रदोष व्रत के दिन महादेव का पूजन किया जाए तो प्रभु प्रसन्न होकर भक्तों पर अपनी कृपा बरसाते हैं। साथ ही उनके सभी कष्टों का भी निवारण कर देते हैं।

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