माँ शारदे कहाँ तू, वीणा बजा रही हैं(Maa Sharde Kaha Tu Veena Baja Rahi Hain)

श्लोक:

सरस्वती नमस्तुभ्यं, वरदे कामरूपिणी,

विद्यारम्भं करिष्यामि, सिद्धिर्भवतु मे सदा।


माँ शारदे कहाँ तू,

वीणा बजा रही हैं,

किस मंजु ज्ञान से तू,

जग को लुभा रही हैं ॥


किस भाव में भवानी,

तू मग्न हो रही है,

विनती नहीं हमारी,

क्यों माँ तू सुन रही है । ..x2

हम दीन बाल कब से,

विनती सुना रहें हैं,

चरणों में तेरे माता,

हम सर झुका रहे हैं,

हम सर झुका रहे हैं


माँ शारदे कहाँ तू,

वीणा बजा रही हैं,

किस मंजु ज्ञान से तू,

जग को लुभा रही हैं ॥


अज्ञान तुम हमारा,

माँ शीघ्र दूर कर दो,

द्रुत ज्ञान शुभ्र हम में,

माँ शारदे तू भर दे । ..x2

बालक सभी जगत के,

सूत मात हैं तुम्हारे,

प्राणों से प्रिय है हम,

तेरे पुत्र सब दुलारे,

तेरे पुत्र सब दुलारे ।


माँ शारदे कहाँ तू,

वीणा बजा रही हैं,

किस मंजु ज्ञान से तू,

जग को लुभा रही हैं ॥


हमको दयामयी तू,

ले गोद में पढ़ाओ,

अमृत जगत का हमको,

माँ शारदे पिलाओ । ..x2

मातेश्वरी तू सुन ले,

सुंदर विनय हमारी,

करके दया तू हर ले,

बाधा जगत की सारी,

बाधा जगत की सारी ।


माँ शारदे कहाँ तू,

वीणा बजा रही हैं,

किस मंजु ज्ञान से तू,

जग को लुभा रही हैं ॥


माँ शारदे कहाँ तू,

वीणा बजा रही हैं,

किस मंजु ज्ञान से तू,

जग को लुभा रही हैं ॥

........................................................................................................
क्यों खास होता है फाल्गुन मास

सनातन धर्म में फाल्गुन मास का विशेष महत्व है। पंचांग के अनुसार, साल का अंतिम महीना फाल्गुन मास होता है। इसके बाद हिंदू नववर्ष शुरू हो जाता है।

विनायक चतुर्थी चालीसा

विनायक चतुर्थी के दिन भगवान गणेश और शिव परिवार की पूजा-अर्चना करने का विधान है। धार्मिक मान्यता है कि गणपति बप्पा की पूजा करने से सभी तरह के विघ्न दूर होते हैं। इसलिए भगवान गणेश को विघ्नहर्ता भी कहा जाता है।

जिसने मरना सीखा लिया है (Jisane Marana Seekh Liya Hai)

जिसने मरना सीखा लिया है,
जीने का अधिकार उसी को ।

विसर नाही दातार अपना नाम देहो - शब्द कीर्तन (Visar Nahi Datar Apna Naam Deho)

गुण गावा दिन रात गुण गवा,
विसर नाही दातार अपना नाम देहो,

डिसक्लेमर

'इस लेख में दी गई जानकारी/सामग्री/गणना की प्रामाणिकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। सूचना के विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/धार्मिक मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संकलित करके यह सूचना आप तक प्रेषित की गई हैं। हमारा उद्देश्य सिर्फ सूचना पहुंचाना है, पाठक या उपयोगकर्ता इसे सिर्फ सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त इसके किसी भी तरह से उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता या पाठक की ही होगी।