मेरा दिल अटका तेरी मूरत पे (Mera Dil Atka Teri Murat Pe)

मेरा दिल अटका तेरी मूरत पे,

मुझको तो किसी की खबर नही ॥


जब से देखा है मैने तुझे,

दिल तेरा दीवाना हो ही गया,

जब से देखा है मैने तुझे,

दिल तेरा दीवाना हो ही गया ॥


मेरे नैनो,

मेरे नैनो को अब तेरे सिवा,

कुछ और तो आता नज़र नही,

मेरा दिल अटका तेरी मूरत पे,

मुझको तो किसी की खबर नही ॥


क्या क्या महिमा बतलाऊँ मैं,

कैसे दिल की बात बताऊँ मैं,

क्या क्या महिमा बतलाऊँ मैं,

कैसे दिल की बात बताऊँ मैं ॥


मेरा बहुत,

मेरा बहुत पुराना नाता है,

मुझपे तो किसी का असर नहीं,

मेरा दिल अटका तेरी मूरत पे,

मुझको तो किसी की खबर नही ॥


जो होगा देखा जाएगा,

अब हम तो रहेंगे चरणों में,

जो होगा देखा जाएगा,

अब हम तो रहेंगे चरणों में ॥


अब भला,

अब भला बुरा माँ क्या सोचे,

हमको तो चिंता फिकर नही,

मेरा दिल अटका तेरी मूरत पे,

मुझको तो किसी की खबर नही ॥


जब इतना कुछ हो जाता है,

दिल मेरा मचलने लगता है,

जब इतना कुछ हो जाता है,

दिल मेरा मचलने लगता है ॥


मिलने को,

मिलने को तड़पड़े मैय्या से,

रहती फिर माँ को सबर नही,

मेरा दिल अटका तेरी मूरत पे,

मुझको तो किसी की खबर नही ॥

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भगवान हनुमान जी की पूजा विधि

हनुमान जी की पूजा में विशेष मंत्रों और नियमों का पालन करना अत्यंत शुभ माना जाता है। पूजन की शुरुआत गणपति वंदना से होती है, जिसके बाद हनुमान जी को स्नान, वस्त्र, आभूषण, सिंदूर, धूप-दीप और प्रसाद अर्पित किया जाता है।

गणाधिप संकष्टी चतुर्थी का मुहूर्त

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत से पहले गणेश जी की पूजा का विधान है। इसी लिए विघ्नहर्ता और मंगलकर्ता गणेश जी को समर्पित गणाधिप संकष्टी चतुर्थी का व्रत करने व्यक्ति के जीवन में सुख, समृद्धि का बनी रहती है।

छूम छूूम छननन बाजे, मैय्या पांव पैंजनिया (Chum Chumu Channan Baje Maiya Paon Panjaniya)

छूम छूूम छननन बाजे,
मैय्या पांव पैंजनिया।

वृश्चिक संक्रांति का महत्व

वृश्चिक संक्रांति पौराणिक कथाओं के अनुसार एक महत्वपूर्ण हिंदू त्योंहार है। यह हिंदू संस्कृति में सौर दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह दिन भगवान सूर्य जी की पूजा के लिए विशेष माना होता है। वृश्चिक संक्रांति के समय सूर्य उपासना के साथ ही मंगल ग्रह शांति एवं पूजा करने से मंगल ग्रह की कृपा होती है।

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