माँ ऊँचे पर्वत वाली, करती शेरो की सवारी(Maa Unche Parwat Wali Karti Shero Ki Sawari)

माँ ऊँचे पर्वत वाली,

करती शेरो की सवारी,

अम्बे माँ,

घर में पधारो मेरी माँ,

अम्बे माँ,

घर में पधारो मेरी माँ ॥


तेरे नाम की ज्योत जली है,

दर्शन को टोली खड़ी है,

अम्बे माँ,

आरती उतारूं मेरी माँ,

अम्बे माँ,

आरती उतारूं मेरी माँ ॥


आँखे दर्शन की है प्यासी,

आजा माता मिटे उदासी,

अम्बे माँ,

चरण पखारूँ मेरी माँ,

अम्बे माँ,

चरण पखारूँ मेरी माँ ॥


हम सब भक्ति भाव ना जाने,

पूजा पाठ नहीं कुछ जाने,

अम्बे माँ,

तेरे ही गुण गाऊं ओ माँ,

अम्बे माँ,

तेरे ही गुण गाऊं ओ माँ ॥


माँ ऊँचे पर्वत वाली,

करती शेरो की सवारी,

अम्बे माँ,

घर में पधारो मेरी माँ,

अम्बे माँ,

घर में पधारो मेरी माँ ॥

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मनोज मुंतशिर रचित भए प्रगट कृपाला दीनदयाला रीमिक्स (New Bhaye Pragat Kripala Bhajan By Manoj Muntashir)

श्री राम जानकी कथा ज्ञान की
श्री रामायण का ज्ञान

गुरु प्रदोष व्रत: शिव मृत्युञ्जय स्तोत्र का पाठ

प्रदोष व्रत त्रयोदशी तिथि को किया जाता है, जो भगवान शिव को समर्पित तिथि है। इस दिन भगवान शिव की पूजा-अर्चना करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। मार्गशीर्ष मास में कृष्ण पक्ष के प्रदोष व्रत का वर्णन और महत्व धार्मिक ग्रंथों और पंचांग में बताया गया है।

सारा बरसाना तेरा दीवाना हुआ(Sara Barsana Tera Deewana Hua)

तेरी मुरली की धुन,
हमने जबसे सुनी,

ऋण-मोचक मंगल-स्तोत्रं (Rin Mochak Mangal Stotram)

मंगलो भूमिपुत्रश्च ऋणहर्ता धनप्रद:। स्थिरासनो महाकाय: सर्व-कर्मावरोधकः॥1॥

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