मत कर तू अभिमान रे बंदे (Mat Kar Tu Abhiman Re Bande)

मत कर तू अभिमान रे बंदे,

जूठी तेरी शान रे ।

मत कर तू अभिमान ॥


तेरे जैसे लाखों आये,

लाखों इस माटी ने खाए ।

तेरे जैसे लाखों आये,

लाखों इस माटी ने खाए ।

रहा ना नाम निशान रे बंदे,

मत कर तू अभिमान ॥


मत कर तू अभिमान रे बंदे,

जूठी तेरी शान रे ।

मत कर तू अभिमान ॥


झूठी माया झूठी काया,

वो तेरा जो हरिगुण गाया ।

झूठी माया झूठी काया,

वो तेरा जो हरिगुण गाया ।

जप ले हरी का नाम ओ बन्दे

मत कर तू अभिमान ॥


मत कर तू अभिमान रे बंदे,

जूठी तेरी शान रे ।

मत कर तू अभिमान ॥


माया का अन्धकार निराला,

बाहर उजला अन्दर काला ।

माया का अन्धकार निराला,

बाहर उजला अन्दर काला ।

इस को तू पहचान रे बंदे,

मत कर तू अभिमान ॥


मत कर तू अभिमान रे बंदे,

जूठी तेरी शान रे ।

मत कर तू अभिमान ॥


तेरे पास हैं हीरे मोती,

मेरे मन मंदिर में ज्योति ।

तेरे पास हैं हीरे मोती,

मेरे मन मंदिर में ज्योति ।

कौन हुआ धनवान रे बंदे,

मत कर तू अभिमान ॥


मत कर तू अभिमान रे बंदे,

जूठी तेरी शान रे ।

मत कर तू अभिमान ॥


मत कर तू अभिमान रे बंदे,

जूठी तेरी शान रे ।

मत कर तू अभिमान ॥

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आजा माँ तेनु अखियां उडीकदीयां (Aja Maa Tenu Ankhiyan Udeekdiyan)

आजा माँ तेनु अखियां उडीकदीयां।
अखियां उडीकदीयां, दिल वाजा मारदा॥

हम राम जी के, राम जी हमारे हैं (Hum Ram Ji Ke Ram Ji Hamare Hain)

हम राम जी के, राम जी हमारे हैं ।
हम राम जी के, राम जी हमारे हैं ।

षटतिला एकादशी पर ना करें ये काम

षटतिला एकादशी भगवान विष्णु जी को समर्पित है। हर साल माघ महीने के कृष्ण पक्ष की एकादशी को ही षटतिला एकादशी के रूप में मनाया जाता है। इस दिन पूरी श्रद्धा के साथ भगवान विष्णु की आराधना करने से पापों से मुक्ति मिलती है।

तिरुमला को क्यों कहा जाता है धरती का बैकुंठ

आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले में त‍िरुमाला की सातवीं पहाड़ी पर स्थित तिरुपति मंदिर विश्व का सबसे प्रसिद्ध है। यहां आने के बाद बैकुंठ जैसी अनुभूति होती है।

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