मेरे गणराज आये है (Mere Ganaraj Aaye Hai)

वक्रतुण्ड महाकाय,

सूर्यकोटि समप्रभ:,

निर्विघ्नं कुरु मे देव,

सर्वकार्येषु सर्वदा ॥


पूजा होती है आपकी,

हे सिद्धि के दाता सर्वदा,

जय हो आपकी।

आप घर आए मेरे,

हम पर कृपा हुई,

हम सब भक्तो की बप्पा,

दुनिया ही गुलशन हुई।

अपनी दया की दृष्टि से,

किरपा करो सब भक्तो पर,

सेवा करेंगे हम सभी,

आकर के तेरी चौखट पर ॥


सजा दो घर को फूलों से,

मेरे गणराज आये है,

लगे कुटिया भी दुल्हन सी,

देव सरताज आए है,

सजा दो घर को फूलों से,

मेरे गणराज आए है ॥


नयन गंगा बहाकर के,

पखारों इनके चरणों को,

मेरे गणराया के संग संग,

मेरे गणराया के संग संग,

ये मूषकराज आए है,

सजा दो घर को फूलों से,

मेरे गणराज आए है ॥


कभी रीझे ना ये धन पे,

पुकारा हमने है मन से,

दुखो को दूर कर सबके,

दुखो को दूर कर सबके,

बचाने लाज आए है,

सजा दो घर को फूलों से,

मेरे गणराज आए है ॥


उमड़ आई मेरी अँखियाँ,

देखकर अपने बप्पा को,

हमारी बिगड़ी किस्मत को,

हमारी बिगड़ी किस्मत को,

बनाने आज आए है,

सजा दो घर को फूलों से,

मेरे गणराज आए है ॥


सजा दो घर को फूलों से,

मेरे गणराज आये है,

लगे कुटिया भी दुल्हन सी,

देव सरताज आए है,

सजा दो घर को फूलों से,

मेरे गणराज आए है ॥

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हे संकट मोचन करते है वंदन(Hey Sankat Mochan Karte Hai Vandan)

हे संकट मोचन करते है वंदन
तुम्हरे बिना संकट कौन हरे,

जिन पर कृपा राम करे (Jin Par Kirpa Ram Kare)

राम नाम आधार जिन्हें,
वो जल में राह बनाते हैं,

आयेगा मेरा श्याम, लीले चढ़ करके (Aayega Mera Shyam. Lile Chadh Karke)

दिल से जयकारा बोलो,
संकट में कभी ना डोलो,

गुप्त नवरात्रि कथा

2025 में उदयातिथि के अनुसार, 30 जनवरी 2025 को माघ गुप्त नवरात्रि की शुरुआत होगी और 7 फरवरी 2025 को गुप्त नवरात्रि का समापन होगा। ऐसे में माघ गुप्त नवरात्र की शुरुआत 30 जनवरी से होगी।

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