मेरे संग संग चलती(Mere Sang Sang Chalti)

संकट में झुँझन वाली की,

सकलाई देखि है,

मेरे संग संग चलती,

दादी की परछाई देखि है,

मेरे संग संग चलती,

दादी की परछाई देखि हैं ॥


कोई राह नज़र ना आए,

जब छाए गम के बादल,

सर पे महसूस किया है,

मैंने दादी का आँचल,

माँ की चुनड़ी मेरे सर पे,

माँ की चुनड़ी मेरे सर पे,

लहराई देखि है,

मेरे संग संग चलती,

दादी की परछाई देखि हैं ॥


ये है तक़दीर हमारी,

जो तेरी शरण मिली है,

क़िस्मत से तू हम भक्तो की,

दादी तू कुलदेवी है,

मेरे सुख दुःख ने हरदम,

मेरे सुख दुःख ने हरदम,

माँ आई देखि है,

मेरे संग संग चलती,

दादी की परछाई देखि हैं ॥


तूने तो दिया है दादी,

मुझको औकात से बढ़कर,

‘सौरभ मधुकर’ की तूने,

रख दी तक़दीर बदलकर,

हमने माँ के दरबार की,

हमने माँ के दरबार की,

सच्चाई देखि है,

मेरे संग संग चलती,

दादी की परछाई देखि हैं ॥


संकट में झुँझन वाली की,

सकलाई देखि है,

मेरे संग संग चलती,

दादी की परछाई देखि है,

मेरे संग संग चलती,

दादी की परछाई देखि हैं ॥

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तेरा दर मिल गया मुझको सहारा हो तो ऐसा हो(Tera Dar Mil Gaya Mujhko Sahara Ho To Aisa Ho)

तेरा दर मिल गया मुझको,
सहारा हो तो ऐसा हो ॥

ये श्री बालाजी महाराज है, रखते भक्तो की ये लाज है (Ye Shree Balaji Maharaj Hai Rakhte Bhakto Ki Ye Laaj Hai)

ये श्री बालाजी महाराज है,
रखते भक्तो की ये लाज है,

बाबा तुम जो मिल गए - श्री श्याम (Baba Tum Jo Mil Gaye)

वो नाव कैसे चले
जिसका कोई खेवनहार ना हो,

माघ कृष्ण की षट्तिला एकादशी (Magh Krishna ki Shattila Ekaadashee)

एक समय दालभ्यजी ने प्रजापति ब्रह्माजी के पुत्र पुलस्त्य जी से प्रश्न किया कि प्रभो! क्या कोई ऐसी भी शक्ति या उपाय है कि जिसके करने से ब्रह्महत्या करने इत्यादि के कुटिल कर्मों के पापों से मनुष्य सरलता पूर्वक छूट जाय भगवन् !

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