मेरो कान्हा गुलाब को फूल (Mero Kanha Gulab Ko Phool)

मेरो कान्हा गुलाब को फूल,

किशोरी मेरी कुसुम कली ॥

मेरो कान्हा गुलाब को फूल,

किशोरी मेरी कुसुम कली ॥


कान्हा मेरो नन्द जू को छौना

राधे मेरी बृषभानु लली

किशोरी मेरी कुसुम कली ।


मेरो कान्हा गुलाब को फूल,

किशोरी मेरी कुसुम कली ॥


कान्हा मांगे माखन लौना

राधे भावे मिश्री की डली

किशोरी मेरी कुसुम कली ।


मेरो कान्हा गुलाब को फूल,

किशोरी मेरी कुसुम कली ॥


कान्हा खेले नन्द जो के अंगना

राधे खेले रंगीली गली

किशोरी मेरी कुसुम कली ।


मेरो कान्हा गुलाब को फूल,

किशोरी मेरी कुसुम कली ॥


ब्रिज निधि दर्शन की प्यासी

वो तो भटके गली गली

किशोरी मेरी कुसुम कली ।


मेरो कान्हा गुलाब को फूल,

किशोरी मेरी कुसुम कली ॥

........................................................................................................
जगन्नाथ रथ यात्रा क्यों मानते हैं

सनातन धर्म में हिंदू वैदिक पंचांग के अनुसार, हर साल आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को भगवान जगन्नाथ की भव्य रथ यात्रा निकाली जाती है। इस यात्रा को रथ महोत्सव और गुंडिचा यात्रा के नाम से भी जाना जाता है।

ऐ री मैं तो प्रेम दिवानी (Ae Ri Main To Prem Diwani)

ऐ री मैं तो प्रेम-दिवानी,
मेरो दर्द न जाणै कोय ।

भाद्रपद शुक्ल की वामन एकादशी (Bhadrapad Shukal Ke Vaman Ekadashi )

इतनी कथा सुनकर पाण्डुनन्दन ने कहा- भगवन्! अब आप कृपा कर मुझे भाद्र शुक्ल एकादशी के माहात्म्य की कथा सुनाइये और यह भी बतलाइये कि इस एकादशी का देवता कौन है और इसकी पूजा की क्या विधि है?

मां वेदों ने जो तेरी महिमा कही है (Maa Vedon Ne Jo Teri Mahima Kahi Hai)

माँ वेदों ने जो तेरी महिमा कही है,
माँ वेदों ने जो तेरी महिमा कही है,

डिसक्लेमर

'इस लेख में दी गई जानकारी/सामग्री/गणना की प्रामाणिकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। सूचना के विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/धार्मिक मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संकलित करके यह सूचना आप तक प्रेषित की गई हैं। हमारा उद्देश्य सिर्फ सूचना पहुंचाना है, पाठक या उपयोगकर्ता इसे सिर्फ सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त इसके किसी भी तरह से उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता या पाठक की ही होगी।