फूलों में सज रहे हैं (Phoolon Mein Saj Rahe Hai)

फूलों में सज रहे हैं,

श्री वृन्दावन बिहारी,

और साथ सज रही है,

वृषभानु की दुलारी ॥


टेढ़ा सा मुकुट सर पर,

रखा है किस अदा से,

करुणा बरस रही है,

करुणा भरी निगाह से,

बिन मोल बिक गयी हूँ,

जब से छबि निहारी,

फूलों में सज रहे है,

श्री वृन्दावन बिहारी ॥


बहियाँ गले में डाले,

जब दोनों मुस्कुराते,

सब को ही प्यारे लगते,

सब के ही मन को भाते,

इन दोनों पे मैं सदके,

इन दोनों पे मैं वारी,

फूलों में सज रहे है,

श्री वृन्दावन बिहारी ॥


श्रृंगार तेरा प्यारे,

शोभा कहूँ क्या उसकी,

इत पे गुलाबी पटका,

उत पे गुलाबी साड़ी,

फूलों में सज रहे है,

श्री वृन्दावन बिहारी ॥


नीलम से सोहे मोहन,

स्वर्णिम सी सोहे राधा,

इत नन्द का है छोरा,

उत भानु की दुलारी,

फूलों में सज रहे है,

श्री वृन्दावन बिहारी ॥


टेढ़ी सी तेरी चितवन,

हर एक अदा है बांकी,

बांके के बांके नैना,

मारे जिगर कटारी,

फूलों में सज रहे है,

श्री वृन्दावन बिहारी ॥


चुन चुन के कलिया जिसने,

बंगला तेरा बनाया,

दिव्य आभूषणों से,

जिसने तुझे सजाया,

उन हाथों पे मैं सदके,

उन हाथों पे मैं वारी,

फूलों में सज रहे है,

श्री वृन्दावन बिहारी ॥


फूलों में सज रहे हैं,

श्री वृन्दावन बिहारी,

और साथ सज रही है,

वृषभानु की दुलारी ॥

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मेरा भोला हे भंडारी, जटाधारी अमली (Mera Bhola Hai Bhandari Jatadhari Amali)

मेरा शिव भोला भंडारी,
जटाधारी अमली,

भगवान शिव का बेलपत्र, धतूरा और भांग से संंबंध

भगवान शिव को देवा का देव कहा जाता है। शिवरात्रि उनका एक प्रमुख त्योहार है। 26 फरवरी को इस बार शिवरात्रि मनाई जाएगी। इस दिन शिवलिंग पर जल के साथ बेलपत्र, धतूरा और भांग चढ़ाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है।

म्हाने जाम्भोजी दीयो उपदेश(Mhane Jambhoji Diyo Upadesh)

म्हाने जाम्भोजी दीयो उपदेश,
भाग म्हारो जागियो ॥

पुत्रदा एकादशी 2025

पौष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को पुत्रदा या वैकुंठ एकादशी भी कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन पुत्र या संतान प्राप्ति के लिए उपाय करने से सफलता मिलती है। मान्यता है कि पुत्रदा एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

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