ओढ़ो ओढ़ो म्हारी जीण भवानी (Odho Odho Mhari Jeen Bhawani)

ओढ़ो ओढ़ो म्हारी माता रानी आज

भगत थारी चुनड़ ल्याया ए

ओढ़ो ओढ़ो म्हारी कुलदेवी आज

भगत थारी चुनड़ ल्याया ए


इ चुनड़ को पोत है मइया जयपुर से मंगवायो

भगतां कै घर बनी चुनड़ी,सांचो माल लगायो

प्यारो लागे चटक रंग लाल

भगत थारी चुनड़ ल्याया ए


सोने चांदी का तार कढ़ाकर लंपि नै जड़वाई

साँचे मोत्या री लड़ियाँ नै चारु मेर लगाई

बीच तारा री सजी रे बारात

भगत थारी चुनड़ ल्याया ए


ओढ़ चुनड़ी बैठी मइया,कितनी प्यारी लागे

तीन लोक में मइया थारी शक्ति का डंका बाजे

रया देव फूल बरसाय

भगत थारी चुनड़ ल्याया ए


म्हारी मइया जी कै भगतो नजर नही लग जावै

लूड़ राई मिल कर वारो जद हीबड़ो सुख पावे

जावै राम बलिहारी आज

भगत थारी चुनड़ ल्याया ए


ओढ़ो ओढ़ो म्हारी माता रानी आज

भगत थारी चुनड़ ल्याया ए

ओढ़ो ओढ़ो म्हारी कुलदेवी आज

भगत थारी चुनड़ ल्याया ए

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भगवान हनुमान जी की पूजा विधि

हनुमान जी की पूजा में विशेष मंत्रों और नियमों का पालन करना अत्यंत शुभ माना जाता है। पूजन की शुरुआत गणपति वंदना से होती है, जिसके बाद हनुमान जी को स्नान, वस्त्र, आभूषण, सिंदूर, धूप-दीप और प्रसाद अर्पित किया जाता है।

छोटी होली और बड़ी होली में अंतर

होली भारत के सबसे प्रमुख त्योहारों में से एक है, जिसे पूरे देश में बड़े उत्साह और हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। यह पर्व रंगों, खुशियों और सामाजिक सौहार्द का प्रतीक है।

दशहरा-विजयादशमी की पौराणिक कथा

शारदीय नवरात्र के बाद 10वें दिन दशहरे का त्योहार देश भर में बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी को माता दुर्गा ने महिषासुर का वध किया था और भगवान श्रीराम ने रावण का वध किया था।

ललिता देवी मूल मंत्र और स्तोत्र

ललिता जयंती का पर्व हर साल माघ मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। अगर व्यक्ति पूरी श्रद्धा के साथ मां की पूजा करे तो मां उसे शक्ति प्रदान करती हैं।

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