सच्चे मन से माँ की, ज्योत तुम जगाओ (Sacche Man Se Maa Ki Jyot Tum Jagao)

सच्चे मन से माँ की,

ज्योत तुम जगाओ,

बिन मांगे सारे फल पाओ ॥


ये ही है दुर्गा ये ही माँ काली,

चाहे किसी भी रूप में मनाओ,

बिन मांगे सारे फल पाओ।

सच्चे मन से मां की,

ज्योत तुम जगाओ,

बिन मांगे सारे फल पाओ ॥


धन यश सुख सब देने वाली,

माँ से भंडार तुम भरवाओ,

बिन मांगे सारे फल पाओ।

सच्चे मन से मां की,

ज्योत तुम जगाओ,

बिन मांगे सारे फल पाओ ॥


तन मन करदो माँ को समर्पण,

शेर चरणों में शीश तुम नवाओ,

बिन मांगे सारे फल पाओ।

सच्चे मन से मां की,

ज्योत तुम जगाओ,

बिन मांगे सारे फल पाओ ॥


जगदाति की कर लो पूजा,

बस दाती के ही हो जाओ,

बिन मांगे सारे फल पाओ।

सच्चे मन से मां की,

ज्योत तुम जगाओ,

बिन मांगे सारे फल पाओ ॥


सच्चे मन से माँ की,

ज्योत तुम जगाओ,

बिन मांगे सारे फल पाओ ॥

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जन्म उत्सव आपका हम,आज (Janam Utsav Aapka Hum Aaj)

जन्म उत्सव आपका हम, आज मनाएंगे,

उत्पन्ना एकादशी व्रत कथा

उत्पन्ना एकादशी की पौराणिक कथा मां एकादशी के जन्म से संबंधित है। इसमें ये बताया गया है कि उन्होंने भगवान विष्णु को एक राक्षस से कैसे बचाया। दरअसल सतयुग में एक मुरा नाम का एक राक्षस था।

श्री रुद्राष्टकम् मंत्र (Sri Rudrashtakam Mantra)

॥ श्रीरुद्राष्टकम् ॥
नमामीशमीशान निर्वाणरूपं
विभुं व्यापकं ब्रह्मवेदस्वरूपम् ।
निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं
चिदाकाशमाकाशवासं भजेऽहम् ॥ १॥ ॥ Shrirudrashtakam ॥
namaamishmishan nirvanarupam
vibhum vyapakam bramvedasvarupam .
nijam nirgunam nirvikalpam niriham
chidakashamakashavasam bhaje̕ham . 1.

ललिता जयंती की पूजा विधि

ललिता जयंती का पर्व हर साल माघ मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। ललिता माता आदिशक्ति त्रिपुर सुंदरी, जगत जननी मानी जाती हैं।

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