शिव पार्वती ने तुम्हे, वरदान दे दिया (Shiv Parvati Ne Tumhe Vardan De Diya)

शिव पार्वती ने तुम्हे,

वरदान दे दिया,

श्री गणेश ये कलयुग,

तुम्हारे नाम कर दिया ॥


ब्रम्हा ने वेद,

सरस्वती ज्ञान दे रही,

विष्णु के संग लक्ष्मी,

धन धान दे रही,

प्रथमेश तुम बनो,

ये अभयदान दे दिया,

श्री गणेश ये कलयुग,

तुम्हारे नाम कर दिया ॥


कैलाश पे तुम्हारी,

जय जयकार कर रहे,

हे गजानंद तुमको,

नमस्कार कर रहे,

सबने तुम्हारे चरणों में,

प्रणाम कर लिया,

श्री गणेश ये कलयुग,

तुम्हारे नाम कर दिया ॥


तुम अष्टविनायक,

तुम्ही बुद्धि के प्रदाता,

सब सुख प्रदान करते,

रिद्धि सिद्धि के दाता,

भक्तो की झोलियों में,

धन धान भर दिया,

श्री गणेश ये कलयुग,

तुम्हारे नाम कर दिया ॥


कलयुग में भव से पार,

चाहो भक्तो जो जाना,

गौरी गजाननन को सदा,

मन से ही ध्याना,

भक्तो के मन में तुमने,

अपना स्थान कर दिया,

श्री गणेश ये कलयुग,

तुम्हारे नाम कर दिया ॥


शिव पार्वती ने तुम्हे,

वरदान दे दिया,

श्री गणेश ये कलयुग,

तुम्हारे नाम कर दिया ॥

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रविवार के व्रत कथा (Ravivaar Ke Vrat Katha)

रविवार व्रत की पौराणिक कथा के अनुसार प्राचीन काल में एक बुढ़िया रहती थी। वह नियमित रूप से रविवार का व्रत करती।

होली और रंगों का अनोखा रिश्ता

होली सिर्फ रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि ये खुशियां, प्रेम और भाईचारे का प्रतीक है। इस दिन लोग एक-दूसरे को रंग लगाते हैं और गिले-शिकवे भुलाकर त्योहार मनाते हैं। लेकिन क्या आपने ये कभी सोचा है कि होली पर रंग लगाने की परंपरा कैसे शुरू हुई? इसके पीछे एक पौराणिक कथा छिपी हुई है, जो भगवान श्रीकृष्ण और प्रह्लाद से जुड़ी है।

गलियां जरा सजा दो, महाकाल आ रहे है (Galiyan Jara Saja Do Mahakal Aa Rahe Hai)

गलियां जरा सजा दो,
महाकाल आ रहे है ॥

ओम सुंदरम ओमकार सुंदरम (Om Sundaram Omkar Sundaram)

ओम सुंदरम ओमकार सुंदरम,
शिव सुंदरम शिव नाम सुंदरम,

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