सुबह सुबह हे भोले (Subha Subha Hey Bhole)

सुबह सुबह हे भोले करते हैं तेरी पूजा,

तेरे सिवा हुआ है ना होगा कोई दूजा ।

ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय ।

ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय ।


भोले तेरी जटा से बहती है गंगा धारा,

सारे जगत के मालिक, तू है पिता हमारा ।

निर्बल का तू ही बल है, देता है तू सहारा

तेरे सिवा जहां में, कोई नहीं हमारा ॥

हे भोले तू है जैसा, वैसा न कोई होगा,

तेरे सिवा हुआ है, ना होगा कोई दूजा ।


सुबह सुबह हे भोले करते हैं तेरी पूजा,

तेरे सिवा हुआ है ना होगा कोई दूजा ।

ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय ।

ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय ।


सुख चैन मांगते हैं, जन्मो के हम भिखारी,

हमपे दया तू करना, आए शरण तिहारी ।

तेरे द्वार पे पड़े हैं, सुनले अरज हमारी,

झोली हमारी भरदे, शिव-शंकर-भंडारी ॥

भव सागर से पार करे, जो कोई नहीं है दूजा,

तेरे सिवा हुआ है, ना होगा कोई दूजा ।


सुबह सुबह हे भोले करते हैं तेरी पूजा,

तेरे सिवा हुआ है ना होगा कोई दूजा ।

ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय ।

ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय ।


तुमको निहारते हैं, आँखों में है निराशा,

विश्वास है ये हमको पूरी करोगे आशा ।

बिगड़ी बना दो अपनी, दृष्टि दया की डालो,

भटके हुए हैं प्राणी, शिव जी हमे संभालो ॥

जब ते रहेंगे हर पल तुझको करते रहेंगे पूजा,

तेरे सिवा हुआ है, ना होगा कोई दूजा ।


सुबह सुबह हे भोले करते हैं तेरी पूजा,

तेरे सिवा हुआ है ना होगा कोई दूजा ।

ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय ।

ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय ।

........................................................................................................
सजा दों उज्जैनी दरबार (Saja Do Ujjaini Darbar)

सजा दो उज्जैनी दरबार,
मेरे महाकाल आये है ॥

उंचिया पहाड़ा वाली माँ, हो अम्बे रानी (Uchiya Pahadawali Maa O Ambe Rani)

उंचिया पहाड़ा वाली माँ,
हो अम्बे रानी,

बैंगन छठ की कहानी क्या है

हर साल बैंगन छठ या चंपा षष्ठी का यह व्रत मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को रखा जाता है। इसे बैंगन छठ के नाम से भी जानते हैं। दरअसल, इस पूजा में बैंगन चढ़ाते हैं इसलिए इसे बैंगन छठ कहा जाता है।

श्री शिवमङ्गलाष्टकम्

भवाय चन्द्रचूडाय निर्गुणाय गुणात्मने ।

डिसक्लेमर

'इस लेख में दी गई जानकारी/सामग्री/गणना की प्रामाणिकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। सूचना के विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/धार्मिक मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संकलित करके यह सूचना आप तक प्रेषित की गई हैं। हमारा उद्देश्य सिर्फ सूचना पहुंचाना है, पाठक या उपयोगकर्ता इसे सिर्फ सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त इसके किसी भी तरह से उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता या पाठक की ही होगी।