थोड़ा देता है या ज्यादा देता है (Thoda Deta Hai Ya Jyada Deta Hai)

थोड़ा देता है या ज्यादा देता है,

हमको तो जो कुछ भी देता,

भोला देता है,

थोड़ा देता हैं या ज्यादा देता हैं ॥


हमारे पास जो कुछ भी है,

ईसी की है मेहरबानी,

हमेशा भेजता रहता,

कभी दाना कभी पानी,

थोड़ा देता हैं या ज्यादा देता हैं,

हमको तो जो कुछ भी देता,

भोला देता है,

थोड़ा देता हैं या ज्यादा देता हैं ॥


हमेशा भूखे उठते है,

कभी भूखे नहीं सोते,

भला तकलीफ हो कैसी,

हमारे भोले के होते,

थोड़ा देता हैं या ज्यादा देता हैं,

हमको तो जो कुछ भी देता,

भोला देता है,

थोड़ा देता हैं या ज्यादा देता हैं ॥


दीया जो भोले बाबा ने,

कभी कर्जा नहीं समझा,

दयालु भोले ने हमको,

हमेशा अपना ही समझा,

थोड़ा देता हैं या ज्यादा देता हैं,

हमको तो जो कुछ भी देता,

भोला देता है,

थोड़ा देता हैं या ज्यादा देता हैं ॥


हमने ‘बनवारी’ हरदम ही,

बड़े अधिकार से मांगा,

खुशी से इसने दे डाला,

जो भी दातार से मांगा,

थोड़ा देता हैं या ज्यादा देता हैं,

हमको तो जो कुछ भी देता,

भोला देता है,

थोड़ा देता हैं या ज्यादा देता हैं ॥


थोड़ा देता है या ज्यादा देता है,

हमको तो जो कुछ भी देता,

भोला देता है,

थोड़ा देता हैं या ज्यादा देता हैं ॥

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करें भगत हो आरती माई दोई बिरियां

सदा भवानी दाहनी।
सदा भवानी दाहनी, सम्मुख रहें गणेश।
पांच देव रक्षा करें,
ब्रह्मा, विष्णु, महेश।

एकादशी व्रत का महत्व

सनातन धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है। एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है। बता दें कि साल में कुल 24 एकदशी पड़ती हैं। हर एकादशी का अपना अलग महत्व होता है। ग्यारहवीं तिथि को एकादशी कहते हैं।

भोले ओ भोले आया दर पे (Bhole O Bhole Aaya Dar Pe)

भोले ओ भोले आया दर पे,
मेरे सिर पे,

ले चल अपनी नागरिया, अवध बिहारी साँवरियाँ(Le Chal Apni Nagariya, Avadh Bihari Sanvariya)

ले चल अपनी नागरिया,
अवध बिहारी साँवरियाँ ।

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