नवीनतम लेख

जिंदगी में हजारों का मेला जुड़ा(Jindagi Me Hajaro Ka Mela Juda)

जिंदगी में हजारों का मेला जुड़ा,

हंस जब-जब उड़ा तब अकेला उड़ा ।

काल से बच ना पाएगा छोटा बड़ा,

हंस जब जब उड़ा तब अकेला उड़ा ॥


ठाट सारे पड़े के पड़े रह गये,

सारे धनवा गढ़े के गढ़े रेह गये,

अन्त मे लखपति को ना ढेला मिला,

हंस जब जब उड़ा तब अकेला उड़ा ॥


बेबसो को सताने से क्या फायदा,

झूठ अपजस कमाने से क्या फायदा,

दिल किसी का दुखाने से क्या फायदा,

नीम के सथ जेसे करेला जुड़ा,

हंस जब जब उड़ा तब अकेला उड़ा ॥


राज राजे रहे, ना वो रानी रही,

ना बुढ़ापा रहा, ना जवानी रही,

ये तो कहने को केवल कहानी रही,

चार दिन का जगत मे झमेला रहा,

हंस जब जब उड़ा तब अकेला उड़ा ॥


जिंदगी में हजारों का मेला जुड़ा,

हंस जब-जब उड़ा तब अकेला उड़ा ।

काल से बच ना पाएगा छोटा बड़ा,

हंस जब जब उड़ा तब अकेला उड़ा ॥

शरण में आये हैं हम तुम्हारी (Sharan Mein Aaye Hain Hum Tumhari)

शरण में आये हैं हम तुम्हारी,
दया करो हे दयालु भगवन ।

गजानन आये मेरे द्वार(Gajanan Aaye Mere Dwar )

गजानन आए मेरे द्वार॥
श्लोक – वक्रतुंड महाकाय,

कल्कि अवतार की पूजा कैसे करें?

हिन्दू धर्म के अनुसार, भगवान विष्णु समय-समय पर धर्म की स्थापना और अधर्म का नाश करने के लिए अवतार लेते हैं। कल्कि, विष्णु के दसवें और अंतिम अवतार माने जाते हैं।

कभी राम बनके, कभी श्याम बनके (Kabhi Ram Banake Kabhi Shyam Banake)

कभी राम बनके कभी श्याम बनके,
चले आना प्रभुजी चले आना ॥