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राम नाम जपते है, मस्ती में रहते है(Ram Naam Japte Hai Masti Mein Rehte Hain)

राम नाम जपते है,

मस्ती में रहते है,

देव है ये सबसे निराला,

इसे कहते हैं बजरंगबाला,

ओ बाला इसे कहते हैं बजरंगबाला ॥


मंगल को जन्मे है मंगल ही करते,

शुक्र और शनि जिनका पानी है भरते,

राम का दीवाना है,

कहता ये जमाना है,

देव है ये सबसे निराला,

इसे कहते हैं बजरंगबाला,

ओ बाला इसे कहते हैं बजरंगबाला ॥


नारियल हो के साथ सवा रुपैया,

भेंट जो चढ़ाए पार कर देते नैया,

बिगड़ी ये बनाते है,

गले से लगाते है,

ऐसे है अंजनी के लाला,

इसे कहते हैं बजरंगबाला,

ओ बाला इसे कहते हैं बजरंगबाला ॥


सिर पे मुकुट कुण्डल कानो में सोहे,

झांकी निराली जो भक्तों को मोहे,

बाँध के लंगोटा जो,

लेके हाथ सोटा जो,

दुष्टों का मुंह करते काला,

इसे कहते हैं बजरंगबाला,

ओ बाला इसे कहते हैं बजरंगबाला ॥


जानकी के प्यारे है अंजनी के दुलारे है,

कलयुग में हमसब भक्तों के सहारे है,

राम का दीवाना है,

कहता जमाना है,

‘नरसी’ को तुमने संभाला,

इसे कहते हैं बजरंगबाला,

ओ बाला इसे कहते हैं बजरंगबाला ॥


राम नाम जपते है,

मस्ती में रहते है,

देव है ये सबसे निराला,

इसे कहते हैं बजरंगबाला,

ओ बाला इसे कहते हैं बजरंगबाला ॥


माघ गुप्त नवरात्रि धन प्राप्ति उपाय

माघ गुप्‍त नवरात्र‍ि की शुरुआत 30 जनवरी 2025 से हो रही है। हिंदू पंचांग के अनुसार, हर साल 2 बार गुप्त नवरात्र का त्योहार मनाया जाता है।

करता है तू बेड़ा पार (Karta Hai Tu Beda Paar)

कोई जब राह ना पाए,
शरण तेरी आए,

नवरात्री वृत कथा (Navratri Vrat Katha)

माँ दुर्गाकी नव शक्तियोंका दूसरा स्वरूप ब्रह्मचारिणीका है। यहाँ श्ब्राश् शब्दका अर्थ तपस्या है। ब्रह्मचारिणी अर्थात् तपकी चारिणी-तपका आचरण करनेवाली। कहा भी है वेदस्तत्वं तपो ब्रह्म-वेद, तत्त्व और तप श्ब्राश् शब्दक अर्थ हैं।

मेरे सरकार का, दीदार बड़ा प्यारा है(Mere Sarkar Ka Didar Bada Pyara Hai)

मेरे सरकार का,
दीदार बड़ा प्यारा है ।