आ रही है पालकी (Aa Rahi Hai Palki)

आ रही है पालकी,

भोलेनाथ शम्भू महाकाल की,

हार फूल धूप बत्ती,

हाथ में है थाल प्रसाद,

शम्भू महाकाल की,

आ रही हैं पालकी,

भोलेनाथ शम्भू महाकाल की ॥


हाथी घोड़े आगे बाजे बैंड बाजे,

देखी झांकी कमाल की,

कोई भूत कोई भोले,

आते जाते हर एक बोले,

जय शम्भू महाकाल की,

साँस चढती आस बढ़ती,

दर्शनों की ललक,

शंभू महाकाल की,

आ जाये सुकून धडकनौ को,

जो दिखे सवारी की झलक,

शम्भू महाकाल की ॥


दुख घटेंगैं सुख बढ़ेंगे,

अपने भक्तों के भरेंगे घाव,

महाकाल जी,

किरपा की तिरपाल रहती,

हैं ये पूरे साल सर पर,

महाकाल की,

जितनी नजर मिले,

उतनी मिले नजर,

महाकाल की,

करम है भरम है,

जीवन में भरे रंग है,

इक नजर मेरे महाकाल की ॥


आ रही है पालकी,

भोलेनाथ शम्भू महाकाल की,

हार फूल धूप बत्ती,

हाथ में है थाल प्रसाद,

शम्भू महाकाल की,

आ रही हैं पालकी,

भोलेनाथ शम्भू महाकाल की ॥


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शिव शंकर तुम कैलाशपति (Shiv Shankar Tum Kailashpati)

शिव शंकर तुम कैलाशपति,
है शीश पे गंग विराज रही,

सर्पों की देवी मनसा की पूजा कैसे करें?

पश्चिम बंगाल की सीमा से सटे झारखंड के कसमार प्रखंड सहित आसपास के गांवों में सर्पों की देवी मां मनसा की पूजा बड़े धूमधाम से मनाई जाती है। हर साल गांवों में जगह-जगह मां मनसा की प्रतिमा स्थापित कर पूजा-अर्चना की जाती है।

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कैलाश के निवासी नमो बार बार हूँ,
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